: पांगन नदी में हो रही है खुलेआम रेत उत्खनन, सड़क बनाने के लिए हजारों हरे-भरे पेड़ को दे दी गई बली, प्रशासन के आंखों में पट्टी बंधा......
Admin
Thu, Jul 1, 2021
बैजनाथ केसरी
रामानुजगंज-------- जिले के दूरस्थ उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे गांव तक जाते-जाते कैसे प्रशासन की पकड़ कमजोर हो जाती है यह इस बात से समझा जा सकता है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के रोके एवं प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद भी यहां 200 से अधिक ट्रक एवं 8 से अधिक पोकलेन मशीन पांगन नदी से अवैध रेत उत्खनन में संलग्न है यहां स्थिति ऐसी है कि ग्रामीण लगातार अवैध रेत खनन का विरोध कर रहे हैं वहीं ठेकेदार अवैध रेत उत्खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं ऐसे में ठेकेदारों के लट्ठेतो एवं ग्रामीणों के बीच संघर्ष की स्थिति कई बार निर्मित हो चुकी है एवं आने वाले समय में भी होती रहेगी।
गौरतलब है कि जब से पांगन नदी में रेत उत्खनन के लिए रेत खदान की नीलामी हुई है तब से लेकर आज तक लगातार नियम कायदे कानून को धत्ता बताकर अवैध रेत उत्खनन करने का आरोप ग्रामीण लगाते रहे हैं ग्रामीणों का आरोप है कि लीज कहीं का एवं खनन कहीं पर होते आ रहा है यहां तक की उत्खनन के लिए खनिज विभाग के द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के विपरीत जाकर भी खनन कार्य लगातार किए गए जिसे लेकर ग्रामीण कई बार लामबंद भी हुए यहां तक कि कई बार आंदोलन भी हुए एवं संघर्ष की भी स्थिति निर्मित हुई परंतु इसके बाद भी रेत उत्खनन में जमकर क्षेत्र में मनमानी की जा रही है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के रोक के बाद भी सनावल क्षेत्र में धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है स्थिति यहां ऐसी है कि 200 से अधिक ट्रक एवं 8 से अधिक पोकलेन मशीन रेत उत्खनन में संलग्न है।
वन भूमि में बनाया था टू लेन सड़क, अब उसे दे रहे हैं थ्रि लेंन का स्वरूप……. ग्राम त्रिशूली के महुआ घाट में वन भूमि जहां पर वन विभाग के द्वारा पौधारोपण किया गया था परंतु रेत के अवैध उत्खनन करने के लिए हजारों पेड़ पौधों की बलि लेते हुए यहां पर टू लेन सड़क का निर्माण कर दिया गया था जहां विरोध स्वरूप राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ वृक्षारोपण किया था परंतु अब यहां सड़क के अत्यंत जर्जर हो जाने के कारण अब उसे 3 लेन सड़क का स्वरूप देने में रेत माफिया लगे हैं।
दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन की तर्ज ग्रामीणों ने किया था अवैध रेत उत्खनन का विरोध……. पांगन नदी में हो रहे अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों में किस प्रकार से आक्रोश है इसे इस बात से समझा जा सकता है कि सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पांगन नदी में हफ्तों अवैध रेत उत्खनन का विरोध करते हुए धरने में बैठे रहे थे स्थिति यहां ऐसी थी कि रात दिन ग्रामीण नदी में ही धरना देकर बैठ गए थे यहीं पर भजन कीर्तन होता था एवं खाना पीना भी यहीं पर होता रहा था।
गांव के विकास को लग रहा है ग्रहण…….. जिस जिस गांव में रेत का उत्खनन हो रहा है उस उस गांव के विकास को भी ग्रहण लग रहा है क्योंकि ट्रक ओवरलोड ग्रामीण सड़कों पर चल रही है जिससे सड़कों की भी स्थिति अत्यंत दयनीय होती जा रही है जिस जिस रास्ते से रेत लोड करके गुजर रही हैं उन रास्तों की ऐसी स्थिति हो गई है कि वहां बरसात के समय तो पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है ऐसे में गांव के विकास को भी ग्रहण लग रहा है।
नदी के अस्तित्व पर लग रहा है प्रश्न चिन्ह ?…… जिस प्रकार से पांगन नदी में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है उससे नदी के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है क्योंकि लगातार रेत के उत्खनन किए जाने से कई स्थानों पर तो रेप ही खत्म हो गए हैं स्थिति ऐसी हो गई है कि वहां पर अब पेड़ पौधे जमना शुरू हो गए हैं जिससे आने वाले समय में क्षेत्र में रेत से मिलना भी मुश्किल हो जाएगा वह नदी के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जाएगा ?
एक ओर खनिज संपदा की लूट हो रही है दूसरी और जिला खनिज अधिकारी से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार उनके मोबाइल पर फोन किया गया परंतु उनके द्वारा रिसीव नहीं किया गया जिससे उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।
इस संबंध में राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने कहा कि क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है रेत उत्खनन का मामला मैंने राज्यसभा में भी उठाया था परंतु इसके बाद भी छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाना समझ से परे है क्षेत्र के नदियों के अस्तित्व पर अवैध उत्खनन के कारण प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है ग्रामीणों के द्वारा लगातार अवैध रेत उत्खनन का विरोध किया जा रहा है परंतु इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं किया जाना समझ से परे है वर्तमान में एनजीटी का रोक है उसके बाद भी धड़ल्ले से रेत उत्खनन हो रहा है श्री नेताम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के द्वारा अवैध रेत उत्खनन में संलग्न होकर अवैध रेत उत्खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है श्री नेताम ने रेत के अवैध भंडारण का भी आरोप लगाया श्री नेताम ने कहा कि 5000 ट्रक से अधिक रेत का भंडारण किया गया है।रामानुजगंज जिले के दूरस्थ उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे गांव तक जाते-जाते कैसे प्रशासन की पकड़ कमजोर हो जाती है यह इस बात से समझा जा सकता है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के रोके एवं प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद भी यहां 200 से अधिक ट्रक एवं 8 से अधिक पोकलेन मशीन पांगन नदी से अवैध रेत उत्खनन में संलग्न है यहां स्थिति ऐसी है कि ग्रामीण लगातार अवैध रेत खनन का विरोध कर रहे हैं वहीं ठेकेदार अवैध रेत उत्खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं ऐसे में ठेकेदारों के लट्ठेतो एवं ग्रामीणों के बीच संघर्ष की स्थिति कई बार निर्मित हो चुकी है एवं आने वाले समय में भी होती रहेगी। गौरतलब है कि जब से पांगन नदी में रेत उत्खनन के लिए रेत खदान की नीलामी हुई है तब से लेकर आज तक लगातार नियम कायदे कानून को धत्ता बताकर अवैध रेत उत्खनन करने का आरोप ग्रामीण लगाते रहे हैं ग्रामीणों का आरोप है कि लीज कहीं का एवं खनन कहीं पर होते आ रहा है यहां तक की उत्खनन के लिए खनिज विभाग के द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के विपरीत जाकर भी खनन कार्य लगातार किए गए जिसे लेकर ग्रामीण कई बार लामबंद भी हुए यहां तक कि कई बार आंदोलन भी हुए एवं संघर्ष की भी स्थिति निर्मित हुई परंतु इसके बाद भी रेत उत्खनन में जमकर क्षेत्र में मनमानी की जा रही है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के रोक के बाद भी सनावल क्षेत्र में धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है स्थिति यहां ऐसी है कि 200 से अधिक ट्रक एवं 8 से अधिक पोकलेन मशीन रेत उत्खनन में संलग्न है।
वन भूमि में बनाया था टू लेन सड़क, अब उसे दे रहे हैं थ्रि लेंन का स्वरूप....... ग्राम त्रिशूली के महुआ घाट में वन भूमि जहां पर वन विभाग के द्वारा पौधारोपण किया गया था परंतु रेत के अवैध उत्खनन करने के लिए हजारों पेड़ पौधों की बलि लेते हुए यहां पर टू लेन सड़क का निर्माण कर दिया गया था जहां विरोध स्वरूप राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ वृक्षारोपण किया था परंतु अब यहां सड़क के अत्यंत जर्जर हो जाने के कारण अब उसे 3 लेन सड़क का स्वरूप देने में रेत माफिया लगे हैं। दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन की तर्ज ग्रामीणों ने किया था अवैध रेत उत्खनन का विरोध....... पांगन नदी में हो रहे अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों में किस प्रकार से आक्रोश है इसे इस बात से समझा जा सकता है कि सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पांगन नदी में हफ्तों अवैध रेत उत्खनन का विरोध करते हुए धरने में बैठे रहे थे स्थिति यहां ऐसी थी कि रात दिन ग्रामीण नदी में ही धरना देकर बैठ गए थे यहीं पर भजन कीर्तन होता था एवं खाना पीना भी यहीं पर होता रहा था।
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