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: शौचालय बना पंडो परिवार का सहारा,पेड़ के नीचे कटती है रात

Admin

Wed, Jun 13, 2018

राकेश मित्तल

अंबिकापुर- शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार की बातें तो रोज सामने आती हैं लेकिन यह किसी परिवार का सहारा बन गया है...ऐसी बात सामने आए तो आपको जरूर अटपटा लगेगा,लेकिन यह सच है और मामला है सरगुजा जिले के विकासखण्ड लखनपुर का जहां शौचालय एक पंडो परिवार के लिए आसरा है।इतना ही नहीं तेज हवा तूफान में घर उजड़ने के बाद पति पत्नी के साथ चार बच्चों वाले इस पंडो परिवार की रात पेड़ के नीचे गुजरती है।यह स्थिति पिछले कई महीनों से है लेकिन राष्ट्रपति दत्तक पुत्रों की सुध अभी तक किसी न नहीं ली है।

                               मिली जानकारी के अनुसार धर्मजीत पंडो सरगुजा जिले के विकासखण्ड लखनपुर के ग्रामपंचायत मांजा का निवासी है जहां पंडोपारा में वह अपनी बीबी और चार बच्चों के साथ कई वर्षों से निवास करता है।घर के नाम पर उसके पास एक छोटी से झोपडी थी जो कई महीनों पूर्व तेज हवा पानी में उजड़ गई थी। झोपड़ी के उजड़ने के बाद धर्मजीत पंडो के पास बीबी बच्चों को लेकर रहने की समस्या उत्पन्न हो गई और इसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे,तब ऐसी स्थिति में स्थिति में उसकी नजर घर के पास स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालय पर पड़ी।धर्मजीत पंडो ने इसके बाद कुछ नहीं सोचा और शौचालय को अपना सहारा बनाने का निर्णय लिया तथा घर का राशन सहित पूरा सामान ले जाकर शौचालय में रख दिया।उसने वहां सामान तो रख लिया लेकिन शौचालय में इतनी जगह नहीं थी कि वह वहां रसोई घर बना सके और सोने की व्यवस्था करे, तब उन्होंने शौचालय के बाहर ही चूल्हा बना दिया और उनमें खाना बनाने लगे। आज उनका पूरा शौचालय के बाहर ही खाना बनाते और खाते हैं।धर्मजीत की शौचालय में सामान रखने और उसके बाहर खाना बनाने खाने की व्यवस्था तो हो गई लेकिन अब उनके पास सोने और रहने की समस्या खड़ी हो गई तब उन्होंने घर के पास पेड़ के नीचे सोने रहने का फैसला लिया और अब उस पेड़ के नीचे उसके पूरे परिवार की रात कटती है,गर्मी,ठंड और बारिश सबका सामना उन्हें करना पड़ रहा है।पढ़ने और सुनने में यह अटपटा तो लग रहा है लेकिन यह सच्चाई है और राष्ट्रपति दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के पंडो परिवार के लिए आज शौचालय ही सहारा है,घर उजड़ने के बाद जिसमें गृहस्थी का पूरा सामान रखा है और इसी के बाहर उनके जीवन की पटरी दौड़ रही है।दूसरे तरफ इस पंडो परिवार की झोपड़ी उजड़े कई महीने हो गए लेकिन प्रशासन ने अब तक उनकी सुध ले राहत दिलाने का प्रयास नहीं किया है जबकि शौचालय को अपना आसरा बनाना किसी अचंभे से कम नहीं है,कमाल की बात तो यह भी है कि अब तक शौचालय में घर के बसाने की बात भी प्रशासन के कानों तक नहीं पहुंची है।बरहाल तेज हवा पानी में आशियाना उजड़ने के बाद स्वच्छ भारत मिशन के तहत बना शौचालय ही पंडो परिवार के लिए कई महीनों से आशियाना बना हुआ है,प्रशासन की उदासीनता उन्हें और कितने दिन इस स्थिति में रहने विवश रखती है देखने वाली बात है।

पंडो लोगों के साथ होने वाली ज्यादतियों से दुखी है समाज

कहने को तो पंडो राष्ट्रपति दत्तक पुत्र और विशेष पिछड़ी जाति है जिन्हें संविधान में विशेष दर्जा प्राप्त है तथा इनके विकास के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपये शान द्वारा खर्च किये जाते हैं।करोड़ों खर्च और विभिन्न योजनाओं के बावजूद पंडो जाति के लोगों का न तो सामाजिक स्तर सुधरा है और नहीं आर्थिक।पंडो जाति के लोगों के साथ प्रशानिक उपेक्षा की बातें भी आये दिन सामने आती हैं,इनके रहवास क्षेत्रों के विकास की बात हो,चिकित्सा सुविधा की बात या अन्य कोई मामला हमेशा उपेक्षित ही रहते हैं।सूरजपुर के ओड़गी ब्लॉक के विजनपाठ में गांव छोडने की चेतवानी के बाद भी शासन प्रशासन ने उन्हें गम्भीरता से नहीं लिया और स्थिति गांव की आज भी बददत्तर है,पंडोनगर के युवकों को बुरी तरह घायल होने के बावजूद चिकित्सा सुविधा नहीं मिली थी और अब शौचालय में सहारा लेने का मामला,आये दिन कोई न कोई नया मामला।प्रशासनिक रूप से विभिन्न तरीकों से पंडो जाति के लोगों के साथ उपेक्षा अब समाज के लोगों को तकलीफ देने लगी है,वे इसे उनके साथ ज्यादती के रूप में देखने लगे हैं क्योंकि उनके आर्थिक सामाजिक विकास के लिए आने वाले करोड़ो रूपये कागजों में खर्च करने के साथ शासन प्रशासन व्यवहारिक रूप से भी सकारात्मक रवैया नहीं अपनाता है जो उनके दुख का कारण बन गया है।समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवराम पंडों ने बताया कि सरगुजा संभाग में हमारी संख्या पंद्रह हजार से ज्यादा है लेकिन बदहाल स्थिति में हैं,कई बार शासन प्रशासन के समक्ष समाज के लोग गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई हमारी नहीं सुनता,अब अपने अधिकार के लिए संगठित हो आंदोलन का रास्ता ही उनके पास बचा है।

बारिश में शौचालय में दुबक जाता है पंडो परिवार

इस पंडो परिवार के लिए स्थिति उस समय भयानक हो जाती है जब उनके गांव में बारिश होने लगती है,ऐसी स्थिति में बच्चों के साथ सभी को शौचालय में ही दुबक कर रहना पड़ता है। जब बारिश ज्यादा होती है और रात का सोनर का समय होता है तो चारों बच्चों को धर्मजीत शौचालय के अंदर सुला देता है और खुद बीबी के साथ भींगते हुए पेड़ के नीचे खड़े रहता है।

गरीबी के कारण नहीं बना पा रहा घर

हवा तूफान में घरनुमा झोपड़ी के उजड़ जाने के बाद धर्मजीत गरीबी के कारण उसे फिर से बना नही पा रहा है। बताया जा है है कि झोपड़ी में खपरे के नीचे लगीं लकड़ियां सड़ गयी थीं जो अब किसी काम की नहीं हैं। गरीबी के कारण वह लकड़ी व अन्य जरूरत का सामान खरीद नहीं पा रहा है।हालांकि अब बारिश के मौसम को देखते हुए समाज की पहल पर गांव वाले मदद को तैयार हैं लेकिन यह मदद कब मिलेगी और कब धर्मजीत पंडों का आशियाना बनेगा फिलहाल यह निर्धारित नहीं है और इस पंडो परिवार को शौचालय के भरोसे ही समय निकालना पड़ेगा।दूसरी तरफ अगर आज सुबह समाज के शिवराम पंडों मांजा के पंडोपारा सामाजिक काम से नहीं जाते तो धर्मजीत के परिवार कर शौचालय को आशियाना बनाने की बात भी सामने नहीं आती जो विकास के लिए काम करने वाले प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनीधियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है जो बातें तो विकास और जनहित की करते हैं लेकिन वास्तविकता बिल्कुल विपरीत।

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