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: पुलिस अफसरों की सफाई उठे सवाल...आरक्षक के आरोप का है मामला..अब पत्रकारिता पुलिस के रहमो करम पर होगी ?

Admin

Mon, Jul 22, 2019

राजेश सोनी

सूरजपुर-सूरजपुर जिले के पुलिस के इस दिनो अच्छे दिन नही चल रहे है पुलिस हवालात की मौत की बात हो या पुलिस के कार्यप्रणाली की,अब तो पुलिस के जवान अपने विभाग से परेशान प्रताडित होकर पुलिस के प्रति खुलकर लिखित शिकायत उच्चअधिकारियो से कर गंभीर आरोप लगा रहे है तो लाजिम है कई सवाल खडे हो रहे है। अब सूरजपुर में एक काला अध्याय की शुरूआत हो रही है। जो अब तक नहीं हुआ था,पुलिस विभाग आरक्षक के आरोप वाली न्यूज का खण्डन कर खुद अपने आप को पाक-साफ बताने की बात,जिससे प्रतीत होता है कि खुद पर लगे आरोप से पुलिस के कप्तान कितने घबराये हुये है अब पुलिस बतायेगी की कलमकारो को कैसे खबर लिखना है साथ ही पुलिस से प्रमाण भी लेनी होगी।बरहाल पिडित आरक्षक ने मामले की शिकायत आईजी से की थी,गंभीर आरोप जिले के कप्तान साहब पर जो था,क्रातिकारी कलमकारो ने पुलिस कप्तान से उनका पक्ष लिया बयान लेकर अपना पत्रकारिता धर्म का पालन करते हुये न्यूज लगा दिया,जिससे हताश बौखलाये कप्तान साहब ने अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक के कंघो बन्दुक रखकर पत्रकारो को पाठ पढाने लगे, अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ सूरजपुर ने एक स्वर में इस घटना की निंदा की है| जिला अध्यक्ष राजेश सोनी ने बताया कि मीडिया शासन-प्रशासन और आम जनता के बीच खबरों के माध्यम से सेतु का काम करती है। ऐसे में मीडिया की अहमियत और पिडितो आदमी के दर्द को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाना यदि गुनाह हो गया, तो हर पत्रकार यह गुनाह बारंबार करेंगे। अभी भी समय है अपने खण्डन और सुविचारो पर खेद कर माफी मांगने का, नही तो स्थिति और विकराल हो जायेगी। कलमकार पुलिस के कार्याे मे कभी हस्तक्षेप नही करता इसी तरह कलमकारो के कार्याे मे पुलिस हस्तक्षेप नही करे। वैसे भी कप्तान साहब का कार्यकाल कितना गौरवशाली है यह किसी से छिपा नही है।अगर कलमकार अपने पे आ जाये तो तन ढकने के लिये कुछ नही बचेगा। स्वतंत्र भारत में केवल एक बार ही प्रेस की आजादी को समाप्त किया गया था, अब और नहीं। प्रेस की स्वतंत्रता प्रजातंत्र की आत्मा है।

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