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सूरजपुर में विश्व आदिवासी दिवस पर दिखा भव्य नजारा, पर चरमराई यातायात व्यवस्था और DJ के शोर से लोग रहे परेशान

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विश्व आदिवासी दिवस : सूरजपुर में विश्व आदिवासी दिवस पर दिखा भव्य नजारा, पर चरमराई यातायात व्यवस्था और DJ के शोर से लोग रहे परेशान

Rameshvar Vaishnaw

Sun, Aug 9, 2026

सूरजपुर। जिला मुख्यालय में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ आदिवासी परंपरा के अनुरूप प्रकृति पूजा-अर्चना और शंखनाद से हुआ, जिसे स्थानीय बैगा, एवं समाज के वरिष्ठ प्रमुखों द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया। इसके बाद आदिवासी समाज ने भव्य रैली निकाली, जिसमें जिले के विभिन्न विकासखंडों से विशाल जनसमूह और आकर्षक झांकियां शामिल हुईं। मानी-केतका, बिश्रामपुर, ओडगी-भैयाथान एवं रामानुजनगर मार्गों से होते हुए ये रैलियां शहर के प्रमुख चौकों से गुजरीं और रंगमंच मैदान में मुख्य सभा के रूप में परिवर्तित हो गईं।

जहां उपस्थित जनसमूह ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कर समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दिवस के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए वर्ष 2026 की थीम “आदिवासी पारंपरिक दाइयों का सम्मान: जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा” पर विस्तार से विचार रखे गए। संविधान के अनुच्छेद 46, 244(1), 275(1), 338A, पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। इसके साथ ही भूमि संरक्षण, स्थानीय रोजगार, फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर रोक, पृथक आदिवासी धर्म कोड और सरगुजा संभाग में लॉ कॉलेज की सीटें बढ़ाने जैसी प्रमुख मांगें रखीं, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक खंड में मेधावी विद्यार्थियों, किसानों, महिलाओं और कलाकारों को सम्मानित किया गया।

डीजे के शोर से लोग रहे परेशान,व्यवस्था अस्त व्यस्त रही..

इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन के दौरान नगर की नागरिक व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी नजर आई। सुबह से ही सड़कों पर वाहनों की रेलमपेल रही, जो वक्त के साथ अत्यधिक बढ़ गई। रैली में शामिल डीजे सिस्टम के अत्यधिक तेज और कर्णभेदी शोर से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। इस आयोजन में कई युवा कई तरह के विभिन्न हथियार लेकर घूमते नजर आए। जिससे लोगों में कोहतुल था। सुप्रीम कोर्ट और प्रशासनिक गाइडलाइंस के बावजूद तय डेसिबल सीमा से अधिक आवाज में बजाए जा रहे डीजे से स्थानीय नागरिक दिनभर परेशान रहे। इस तेज आवाज का सबसे गंभीर असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, बीपी व हृदय रोगियों तथा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ा।

​इसके अलावा, शहर के चाक-चौराहों पर पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद यातायात व्यवस्था पूरी तरह धराशायी रही। सड़कों पर दिनभर लंबा जाम लगा रहा और अनियंत्रित गति से दौड़ती मोटरसाइकिलों व विचित्र हॉर्न के शोर से राहगीर हलकान होते रहे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष इस आयोजन में इसी तरह की अव्यवस्था सामने आती है, लेकिन बीते वर्षों के अनुभवों से सीख न लेते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा कोई पुख्ता रणनीति तैयार नहीं की गई, जिससे जनता में गहरा असंतोष देखा गया।

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