ब्रेकिंग

कलेक्टर मैडम का '15 दिन' का नया वादा, ग्रामीणों का '10 दिन' का अल्टीमेटम; बीच में अटका ठेकेदार का चेक

मेहंदी, रंगोली एवं स्वस्थ शिशु प्रतियोगिताओं में महिलाओं और बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

दीयों की चकाचौंध में गुम हुई गोबरी नदी की टूटी पुलिया: तेल के दाम से रसोई ठंडी, पर भाषणों से सूरजपुर हुआ ‘रोशन’!

ताली, थाली और अब दिया,‘दीया टास्क’,

PM मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन के उपलक्ष्य में भाजपा चलाएगी 'सेवा संकल्प अभियान'

सूचना

अल्टीमेटम : कलेक्टर मैडम का '15 दिन' का नया वादा, ग्रामीणों का '10 दिन' का अल्टीमेटम; बीच में अटका ठेकेदार का चेक

Rajesh Soni

Wed, Sep 23, 2026

15 दिन की 'वारंटी' लेकर आया था 15 लाख का रपटा: गोबरी नदी की पहली ही धार में बहा सरकारी 'इंजीनियरिंग का कमाल'

​​पुल तो नदी ले गई, अब NH-43 पर चक्काजाम का जाम पिलाने की तैयारी में जनता और नेताजी

सूरजपुर। हमारे देश में दो-चार दिन की धूप-छांव भले टिक जाए, पर सरकारी विकास कब पानी में बह जाए—इसका कोई भरोसा नहीं। ताजा और चमकदार नमूना सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक स्थित डबरीपारा (खुटरापारा) से आया है। यहां गोबरी नदी पर ₹15 लाख फूंककर एक रपटा पुल खड़ा किया गया था। निर्माण ऐसा हुआ कि सीमेंट-गिट्टी ने 15 दिन में ही हाथ खड़े कर दिए और नदी की पहली धार के साथ रपटा साहब खुद तैरने निकल पड़े।

​अब पुल तो बह गया, पर ग्रामीणों का पारा उबल पड़ा है। बुधवार को गुस्साए ग्रामीणों और नेताओं ने कलेक्ट्रेट का रुख किया और कलेक्टर रेना जमील के हाथों में ज्ञापन थमाकर दो-टूक कह दिया—"या तो 10 दिन में काम शुरू करो, वरना NH-43 पर ऐसा जाम लगाएंगे कि प्रशासन को पहियों की जगह नाव चलानी पड़ेगी।"

जब जनसहयोग से घबराकर जागी थी सरकारी अंतरात्मा

कहानी में ट्विस्ट यह है कि पिछले साल जून में पुराना मुख्य पुल टूटा था। सालभर तक जब किसी अफसर की कलम नहीं हिली, तो आजिज आकर ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर पुल बनाना शुरू कर दिया। अब जनता खुद पुल बना ले तो सरकारी शान में बट्टा लगता! सो, आनन-फानन में प्रशासन ने दौड़कर ₹15 लाख का सरकारी बजट पास कर दिया। जनता खुश हुई कि सरकार जाग गई, लेकिन यह नहीं जानती थी कि 15 लाख का यह पुल केवल 15 दिन के 'डेमो' के लिए बन रहा है।

15 दिन की जिंदगी, अब 15 दिन का नया आश्वासन

अब जब घटिया निर्माण की पोल गोबरी नदी ने खोल दी, तो विभाग ने ठेकेदार का पेमेंट रोककर इतिश्री कर ली है। उधर, कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को कलेक्टर साहिबा ने फिर वही जादुई संख्या दोहराते हुए '15 दिन' में काम शुरू कराने का आश्वासन दे दिया है। अब क्षेत्र में चर्चा है कि पिछला रपटा 15 दिन में बह गया, तो क्या नए वादे की उम्र भी पखवाड़े भर ही रहेगी?

स्कूल, मरीज और एंबुलेंस 'अधर' में, अफसरों की आंखें बंद

पुल बहने से हालात यह हैं कि स्कूल जाने वाले नौनिहाल और '108' एंबुलेंस किनारे खड़े होकर नदी को निहार रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जुलाई में ही एसडीएम साहब को चिट्ठी लिखकर चेताया था कि रपटा गिर सकता है, लेकिन सरकारी फाइलें तभी तेजी से दौड़ती हैं जब पुल सच में गिर जाए।

मांगें तीन, अल्टीमेटम एक: 'वरना ढाबे के सामने होगा चक्काजाम'

ग्रामीणों ने साफ लफ्जों में तीन मांगें रखी हैं—टूटे रपटे की तुरंत मरम्मत हो, पानी से न डरने वाला एक पक्का पुल बने और सीमेंट में पानी मिलाने वाले ठेकेदार-इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई हो। जनपद सभापति राजू गुप्ता ने साफ चेतावनी दी है कि 10 दिन में बुलडोजर नहीं चला, तो वे ग्रामीणों संग डुमरिया के विश्वकर्मा ढाबा के पास NH-43 पर दरी बिछाकर धरने पर बैठेंगे।

​ज्ञापन सौंपने वालों में डबरीपारा, बांसापारा और गंगौटी के सरपंच-उपसरपंच सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे, जो अब हाथ में कैलेंडर लेकर 10 दिन उल्टे गिन रहे हैं।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें