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ताली, थाली और अब दिया,‘दीया टास्क’,

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देवलोक की बेबाक बाते : ताली, थाली और अब दिया,‘दीया टास्क’,

Rajesh Soni

Thu, Sep 17, 2026

देवलोक की बेबाक बाते

व्यंग्य डेस्क। कलयुग के आधुनिक संस्करण ‘हालयुग’ से एक बेहद ज्ञानवर्धक और सुगंधित खबर सामने आ रही है। सूत्रों की मानें तो मनुष्य योनि से सीधे ‘महामानव’ श्रेणी में प्रमोट हुए आधुनिक देवताओं ने अपने प्रिय भक्तों के लिए एक और नया ‘वर्क फ्रॉम होम’ टास्क जारी कर दिया है।

​ताली और थाली के ऐतिहासिक महा-ऑपरेशन के बाद, अब नया फरमान है—‘दीया जलाओ अभियान’। जानकारों का कहना है कि जनता पहले से ही महंगाई और कार्यकुशलता के ताप से अंदर तक जली-भुनी बैठी थी, ऐसे में ऊपर से दीया जलाने के आदेश ने माहौल में हल्का सा ‘धुआं’ और बढ़ा दिया है।

प्रोटोकॉल का पालन: हुक्म-ए-आला और मास्टरस्ट्रोक

​पढ़े-लिखे और डिग्रीधारी ‘विशेषज्ञ भक्तों’ ने अपने परम-पिता समान मार्गदर्शक के आदेश को अक्षरशः जमीन पर उतार दिया। बालकनी से लेकर छतों तक ऐसा समां बंधा कि क्या बताए। दिलचस्प मोड़ तब आया जब खोजी परिंदों ने देखा कि खुद के दफ्तर इस दिए की आग की तपीस से दूर रहा।

‘देसी परफ्यूम’ और आर्गेनिक सोच की बहार

​ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, जिले-कस्बों में अब विदेशी सेंट की जगह एक खास देसी अर्क की महक तैर रही है। वहीं खेतों में पड़ने वाली पारंपरिक खाद अब कुछ खास किस्म के सोशल मीडिया विश्लेषकों की विचार-प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा बन चुकी है। तर्कशास्त्रियों का कहना है कि जब सोच पूरी तरह जैविक (organic) हो जाए, तो विचारों का उपजाऊपन सीधे गोबर स्तर पर पहुंच जाता है।

​फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। भक्तगण अपनी आस्था का रिचार्ज कराकर अगले टास्क—शायद ‘एक पैर पर खड़े होकर घंटी बजाना’—के इंतजार में पूरी तरह मुस्तैद हैं।

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