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रेलवे परियोजना में जमीन गंवाने के 14 साल बाद भी मुआवजा अधूरा, पीड़ित परिवार ने दी आत्मघाती कदम की चेतावनी

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मुआवजा अधूरा : रेलवे परियोजना में जमीन गंवाने के 14 साल बाद भी मुआवजा अधूरा, पीड़ित परिवार ने दी आत्मघाती कदम की चेतावनी

Rajesh Soni

Thu, Sep 10, 2026

रामानुजनगर तहसील के सूरता गांव में 0.09 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण का मामला

स्वीकृत 1.77 लाख रुपये के भुगतान के लिए दर-दर भटक रहा परिवार, कलेक्टर से लगाई गुहार

सूरजपुर। रेलवे परियोजना के तहत पैतृक भूमि अधिग्रहित किए जाने के 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी एक ग्रामीण परिवार को स्वीकृत मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हो सका है। प्रशासनिक उपेक्षा और दफ्तरों की जटिल प्रक्रिया से तंग आकर ग्राम नमदगिरी निवासी प्रभावित परिवार ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए 30 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर सामूहिक आत्मघाती कदम उठाने की चेतावनी दी है। ग्राम नमदगिरी निवासी संतलाल, मुनीलाल, शिवलाल और प्रसोत्तम ने कलेक्टर को प्रेषित ज्ञापन में उल्लेख किया है कि रामानुजनगर तहसील अंतर्गत ग्राम सूरता स्थित उनकी पैतृक भूमि (खसरा नंबर 226) में से 0.09 हेक्टेयर रकबा संयुक्त रेलवे लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित किया गया था। इस अधिग्रहण के एवज में प्रशासन द्वारा 1,77,912 रुपये का मुआवजा अवार्ड पारित किया गया था, जिसका वितरण आज तक लंबित है।

फौती नामांतरण के बाद भी उलझा रहा प्रकरण

आवेदकों के अनुसार, भूमि का मुआवजा प्रारंभिक तौर पर परिवार की बुजुर्ग महिला के नाम से स्वीकृत हुआ था। राशि आहरण से पूर्व ही उनका देहांत हो गया। इसके उपरांत राजस्व अभिलेखों में विधिवत फौती नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर जमीन परिवार के अन्य उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करा दी गई। आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बावजूद मुआवजा वितरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

कर्ज के बोझ तले दबा परिवार

​आवेदकों का कहना है कि जिस कृषि भूमि से परिवार की आजीविका चलती थी, वह 14 वर्ष पहले ही रेलवे परियोजना की भेंट चढ़ गई। लंबे समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने में भारी आर्थिक व्यय हो चुका है। मुआवजे के अभाव में परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और दैनिक जीवन-यापन के लिए कर्ज पर निर्भर होने को विवश है।

​पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से प्रकरण की प्रशासनिक जांच कराने, मुआवजा सूची की अधिकृत प्रति उपलब्ध कराने तथा स्वीकृत राशि अविलंब बैंक खाते में अंतरित कराने की मांग की है। परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर निराकरण नहीं हुआ, तो होने वाले किसी भी अप्रिय कदम की समस्त जवाबदेही शासन-प्रशासन और रेलवे प्रबंधन की होगी।

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