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वादियों में बिखरी प्रकृति की अनुपम छटा,जंगलों पर धुंध की चादर, लगातार बारिश से बदला अंचल का मिजाज

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चांदनी-बिहारपुर : वादियों में बिखरी प्रकृति की अनुपम छटा,जंगलों पर धुंध की चादर, लगातार बारिश से बदला अंचल का मिजाज

Rajesh Soni

Wed, Sep 2, 2026

सात दिनों से जारी फुहारों से धुली हरियाली, हिल स्टेशन जैसा बना सुदूर वनांचल का नजारा

पहाड़ी चोटियों से अठखेलियां करते बादलों ने बढ़ाई खूबसूरती, लेकिन स्थानीय जनजीवन के लिए बनी चुनौती

सूरजपुर। सूरजपुर जिले का सुदूर चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र इन दिनों प्रकृति के सबसे मनमोहक और नयनाभिराम रूप में नजर आ रहा है। पिछले करीब एक सप्ताह से जारी रिमझिम बारिश ने पूरे वनांचल और पहाड़ी अंचल को हरियाली की सघन चादर से ढक दिया है। दिनभर आसमान में डेरा डाले मेघों के कारण धूप तो नहीं खिली, लेकिन बारिश से धुली हरी-भरी वादियों, सघन साल-सागौन के जंगलों और घुमावदार पहाड़ी मोड़ों पर फैली नैसर्गिक सुंदरता किसी प्रसिद्ध हिल स्टेशन का अहसास करा रही है।

पहाड़ों पर तैरती धुंध और बादलों की अठखेलियां

क्षेत्र की ऊंची-नीची पहाड़ियों की चोटियों पर इन दिनों घने सफेद कोहरे और धुंध का बसेरा है। हरी-भरी घाटियों के बीच से उठती धुंध जब पेड़ों की डालियों को छूकर गुजरती है, तो समूचा परिदृश्य जीवंत और सम्मोहक प्रतीत होता है। लगातार हो रही बारिश ने स्थानीय जलस्रोतों, बरसाती नालों और प्राकृतिक झरनों में नया प्रवाह भर दिया है, जिससे क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र (इकोसिस्टम) पूरी तरह तरोताजा हो उठा है।

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच ग्रामीणों की जमीनी चुनौतियां

प्रकृति के इस विहंगम दृश्य के समानांतर स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह मौसम दोहरी परीक्षा लेकर आया है:

दलदल में तब्दील कच्चे रास्ते: बारिश से धुलते जंगलों के बीच से गुजरने वाली ग्रामीण कच्ची सड़कें कीचड़ में तब्दील हो गई हैं, जिससे आवागमन जोखिम भरा हो गया है।

सौर ऊर्जा पर असर: बादलों के लगातार छाए रहने से सौर ऊर्जा संयंत्रों को पर्याप्त धूप नहीं मिल पा रही है, जिससे वनांचल के गांवों में शाम ढलते ही अंधेरा पसर जाता है।

वन्यजीवों की हलचल: घने जंगलों और बारिश के बीच मोहरसोप क्षेत्र में जंगली हाथियों की सक्रियता ने ग्रामीणों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है।

​प्रकृति अपने पूरे निखार पर है और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं, फिर भी ग्रामीण अंचल के लोग अब धूप खिलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी फिर से सुचारू रूप से पटरी पर लौट सके।

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