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: खेत में जोताई के विवाद को लेकर हत्या करने वाले पति,पत्नी सहित पुत्र,पुत्री को आजीवन कारवास की सजा.......

Admin

Sat, Sep 25, 2021

बैजनाथ केशरी

रामानुजगंज-------- खेत में जोताई करने के विवाद के बाद लाठी डंडा से मार कर हत्या करने वाले पति, पत्नी और पुत्र, पुत्री को द्वितीय अपर सत्र विद्वान न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने आजीवन कारवास की सजा सुनाया है खेत मैं जोताई के विवाद को लेकर जिला मुख्यालय बलरामपुर थाना अंतर्गत बड़कीमहरी  के रहने वाले  55 वर्षीय मनोहर चेरवा उर्फ मनो पिता स्वर्गीय मेघन राम, पत्नी 51 वर्षीय जसपति देवी पती मनोहर राम , पुत्र 25 वर्षीय गुरुदेव प्रसाद पिता मनोहर चेरवा ,पुत्री 23 वर्षीय चांदनी पिता मनोहर चेरवा को द्वितीय अपर सत्र के विद्वान न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने धारा 302 / 34 के तहत आजीवन कारावास एवं सभी अभियुक्त को तीन - तीन सौ रुपए से अर्थदंड से दंडित किया है अर्थदंड अदा न किए जाने पर 1 वर्ष के अलग से सश्रम कारावास की सजा की प्रावधान है। धारा 323 / 34 के तहत 6 माह का सश्रम कारावास एवं प्रत्येक अभियुक्त को दो - दो सौ रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है अर्थदंड अदा किए जाने पर एक माह अलग से सश्रम  कारवास भुगतना पड़ेगा। राज्य द्वारा लोक अभियोजक विपिन बिहारी सिंह थे । इस संबंध में बताया गया कि घटना दिनांक 23 जून 2018 के शाम 6 बजे बलरामपुर थाना अंतर्गत ग्राम बड़कीमहरी में जब प्रार्थी देवसाय चेरवा खेत में ट्रैक्टर से जोताई करा था तभी अभियुक्त लोग आकर जोताई करने से मना करने लगे और विवाद करने लगे इतने में विवाद करते हुए लाठी डंडा से प्रार्थी को मारने लगे मारपीट अधिक देखकर गांव के ही बीज बचाव करने पहुंचे  मृतक ननेन्दर को भी सिर और पैर में लाठी डंडा से मार कर गंभीर चोट पहुंचाया और मृतक खेत में ही गिर गया और उसकी मृत्यु हो गई प्रार्थी के रिपोर्ट पर सभी अभियुक्त पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री के विरुद्ध धारा 302, 294, 506, 323/ 34 के तहत बलरामपुर पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध किया था।  अपने आदेश में न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने लिखा है कि यह अवधारित किया जाना उचित होगा कि न्यायालय को ना केवल अपराध की प्रकृति उसके लिए विहित दंड समाज की आवश्यकताओं एवं आयुक्त के प्रति उपशमनकारी एवं गुरुतरकारी परिस्थितियों के प्रति ही ध्यान नहीं देना है बल्कि अपराध के पीड़ित एवं उसके आश्रितों को न्याय प्रदान करने की आवश्यकता को भी विचार में रखना होगा। बिधाई परिवर्तनों एवं शीर्ष न्यायालय के विनिस्चयो के बावजूद यह पहलू ध्यान देने से बच जाता है एवं उसकी आश्रितों की दुर्दशा कि यहां तक की जब भी उपेक्षा की जा सकती है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अपराध अदण्डित ही रह जाता है। पीड़ित अथवा आश्रितों को न्याय संगत मुआवजे का निर्धारण चिकित्सा एवं अन्य ब्ययो पीड़ा एवं कष्ट उपार्जन की हानी और अन्य सुसंगत कारको का ध्यान में रखकर किया जाना है।।

मृतक के परिजनों को क्षतिपूर्ति राशि देने की अनुशंसा-----------  द्वितीय अपर सेशन न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने दिए गए आदेश में लिखा है कि मृतक के परिजनों को मुआवजे का भुगतान राज्य द्वारा किए जाने के संबंध में विस्तार में प्रतिपादित मार्गदर्शक सिद्धांत के आलोक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलरामपुर , जिला बलरामपुर - रामानुजगंज, छत्तीसगढ़ समुचित जांच उपरांत निर्णय प्राप्ति दिनांक से 3 माह की अवधि के भीतर क्षतिपूर्ति योजना 2011 के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति निधि से मृतक के परिजनों  को मृतक की मृत्यु के संबंध में पर्याप्त क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की गई है।

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