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: घटिया निर्माण की भेंट चढ़ता स्टॉप डेम एवम एनीकेट लोगो के मंसूबे पर फिर रहा पानी

Admin

Sat, Mar 23, 2019

।सचिन तायल

प्रतापपुर बड़े बड़े पत्थर ओ भी जंगल से निकाल स्टॉप डेम व एनीकट का निर्माण किया जा रहा है,सिर्फ एक तरफ मिट्टी की दीवाल व इसमें जंगल से निकाले पत्थर बिछा तालाब बना दिया गया,यह स्थिति तमोर पिंगला के खोंड क्षेत्र की है जहां निर्माण कार्यों में व्यापक भर्राशाही की जा रही है तथा घटिया निर्माण कर शासन को लाखों का चूना लगाया जा रहा है।वर्तमान में यहां चल रहे करीब दो करोड़ के कामों में यह स्थिति तो है ही लेकिन पूरे तमोर पिंगला क्षेत्र में निर्माण कार्यों में भ्र्ष्टाचार का बोलबाला है और हमेशा से यही होता है।साथ ही निर्माण कार्य विभाग के रेंजर व अन्य अधिकारियों द्वारा स्थानीय दबंग लोगों के माध्यम से ठेकेदारी से काम कराने की जानकारी भी मिली है।
गौरतलब है कि तमोर पिंगला अभ्यारण्य में जंगल के अंदर पानी के स्त्रोत जंगली जानवरों के लिए बढ़ाने के उद्देश्य से एनीकट,स्टॉप डेम,तालाब,बांध आदि का निर्माण कराने शासन करोड़ों रुपये विभाग को देती है लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों में जमकर भर्राशाही की जाती है और घटिया निर्माण कर शासन को बड़े पैमाने पर चुना लगाया जाता है और स्वयं भ्र्ष्टाचार कर मालामाल हो जाते हैं।वर्तमान में तमोर पिंगला अभ्यारण्य के खोंड क्षेत्र में करीब दो करोड़ की लागत से तालाब,स्टॉप डेम और एनीकट का निर्माण किया जा रहा है जिसमें महोबार जंगल में तालाब निर्माण,डौकी बुड़ा,दौरी पथना,खम्हरा नाला,बूढ़ी नाला व अन्य स्थानों में स्टॉप डेम/एनीकट निर्माण आदि काम शामिल हैं।ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार इन निर्माण कार्यों में जमकर भर्राशाही की जा रही है,किसी ग्रामीण को कोई जानकारी नहीं दी जाती,किसी भी काम के पास सूचना बोर्ड नहीं है ताकि किसी को कुछ पता न चल सके।उन्होंने बताया कि माहोबार जंगल में 20 लाख से ज्यादा की लागत से तालाब का निर्माण कराया गया है,मौके ओर देखें तो इसके निर्माण में अधिकतम 2 लाख रुपये की लागत आई होगी।मजदूरों की बजाए जेसीबी से काम कराया गया है,दिखाने के लिए कुछ मजदूर लगा दिए गए थे,जिस जगह पर यह निर्माण हुआ है वहां पहले से ही एक ओर दीवालनुमा था बस बीच से कुछ गाड़ियां मिट्टी खुदवा दीवाल को ऊंचा कर दिया गया है तथा जंगल से ही पत्थर निकाल दीवाल के दोनों ओर बिछा दिया गया है जबकि जंगल के इन पत्थरों की बजाए बोल्डर का प्रयोग करना था।उन्होंने बताया कि जेसीबी से काम करा मजदूरों के नाम से फर्जी हाजिरी भरी गई है,उनके खाते में भुगतान डाल वापस ले लिया जाएगा,विभाग के कर्मचारियों द्वारा गांव नें घूम घूम मजदूरों के खाते नम्बर मांगे गए हैं,यही नहीं सम्बंधित अन्य दस्तावेज भी फर्जी रूप से संधारण किए जाएंगे।ग्रामीणों ने इस तालाब के नाम पर हुए फर्जीवाड़े की जांच की मांग की है।

स्टॉप डेम व एनीकट बन रहे बड़े बड़े बोल्डरों से

तालाब के साथ डौकी बुड़ा,दौरी पथना,खम्हरा नाला,बूढ़ी नाला में स्टॉप डेम व एनीकट का निर्माण तमोर पिंगला के खोंड क्षेत्र में हो रहा है जिनका निर्माण बहुत ही घटिया हो रहा है।ग्रामीणों ने बताया कि विभाग के अधिकारी इनमें छोटी व क्रेशर की गिट्टी का प्रयोग दिखावा मात्र के लिए कर रहे हैं और इनका निर्माण जंगल से निकाले बड़े बड़े बोल्डरों से कर रहे हैं,पत्थर भी जंगल में बिखरे पड़े या खोदकर निकले जा रहे हैं जो घटिया क्वालिटी के हैं।पत्थर के साथ ही सीमेंट और बालू का रेसियो भी सही नहीं है,बालू की मात्रा बहुत ज्यादा मिलाई जा रही है।विभाग के लोगों द्वारा उनके निर्माण में भी घटिया निर्माण के साथ जमकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है,जानकारों की मानें तो एक एनीकट/स्टॉप डेम पांच लाख रुपए के आसपास में ही पूर्ण हो जाएगा।

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