: आखिर नप ही गए.? प्रेमसाय सिंह हटे या हटाये गए...जिले में भी शिक्षा व्यवस्था नही सुधार पाए...
Admin
Thu, Jul 13, 2023
राजेश सोनी
सूरजपुर. आखिरकार डा० प्रेमसाय टेकाम प्रदेश के शिक्षा मंत्री पद से हटा दिए गए है और ये तो होना ही था।करीब 50 हजार मतों के अंतर से जीते प्रेम साय को कांग्रेस सरकार ने मंत्रीमंडल में शामिल कर उन्हें लगभग उपहार दिया था और इस उम्मीद में कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधरे न सुधरे पर उनके जिले में तो कम से सुधरेगी।पर ये क्या उनके जिले में तो हालत और बढ़ से बदतर हो गई।बिहारपुर जैसे इलाके में स्कूल 15 अगस्त 26 जनवरी के दिन ही खुलते हैं गुरुजी आते नही गुरुजी ठेके पर पढ़ाई करा रहे इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से हुई तो उन्होंने क्षेत्र में आमूल चूल परिवर्तन के निर्देश दिए पर क्या हुआ केवल वसूली एक भी गुरुजी को नही बदला गया।रामनगर में हायर सेकेंडरी की घोषणा मुख्यमंत्री कर के गए लेकिन शिक्षा मंत्री के मित्र जिला शिक्षा अधिकारी आज तक घोषणा पर अमल नही कर पा रहे है।बच्चे परेशान है। कलेक्टर से भी शिकायत हुई पर वहां से भी कोई राहत नही मिली। इन दिनो छत्तीसगढ प्रदेश की राजनीति पुरे उफान में है कुछ दिन पहले अम्बिकापुर के विधायक प्रदेश के स्वास्थ मंत्री टी एस सिहदेव को उप मुख्यमंत्री बनाया गया इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से मोहन मरकाम की छुटटी कर उनके जगह पर दिपक बैज को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौपी गई है अनुमान लगाये जा रहे है कि मोहन मरकार या फिर धनेंद्र साहु में से किसी एक को मंत्रीमण्डल में जगह मिल सकती है. चुनाव के 5 माह बचे है ऐसे में सरकार की नजर साफ है जिस विधायक मंत्री का मतदाताओं के बीच छवि सही नही है ऐसे लोगो को किनारे लगाने में लगी है अब बात करे पूर्व शिक्षा मंत्री डा0 प्रेमसाय टेकाम की जो प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक है प्रदेश सहित उनके गृह जिले में शिक्षा का हाल बेहाल है तबादला उद्योग की जमकर चर्चा रही. प्रतापपुर विधानसभा के मतदाताओ से मंत्रीजी की बढ़ती दुरी किसी से छिपी तक नहीं है कोई एक कारण नहीं है कई समस्या है जो विधायक मंत्री बनते ही जनता जर्नादन के विपरित होते गये. फिलहाल वे अपने मंत्री प्रतिनिधी के पद को लेकर काफी विख्यात रहे, प्रदेश के अनोखे मंत्री रहे डा० प्रेमसाय टेकान जिन्होने ने अपना मंत्री प्रतिनिधि भी बनाया जो उनकी गैर मौजूदगी में जनता के दुखदर्द का भागीदार बन सके लेकिन ऐसा नहीं हो सका. ऐसा नहीं है कि मंत्रीजी का रिपोटकार्ड प्रदेश के आला कमान को नही मालुम. 15 सालो तक सत्ता से दूर रहे काग्रेसियों को सत्ता का स्वाद चखने को मिला. अब इसे बरकारार रखने की चिन्ता सता रही है कही फिर से सत्ता हाथ से गवानी न पड़ जाये. ऐसे में डेमेज कन्ट्रोल करने की कवायत की जा रही है.
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