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ज़मीन अधिग्रहण पर खूनी संघर्ष : DSP समेत 24 से अधिक पुलिसकर्मी घायल,कई पुलिस वाहनों में तोड़फोड़

Rajesh Soni

Fri, Jul 24, 2026

सूरजपुर। जिले के प्रतापपुर क्षेत्र के मदननगर गांव में शुक्रवार सुबह जो कुछ हुआ, उसने प्रशासनिक कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। ज़मीन अधिग्रहण के विरोध में उतरा ग्रामीणों का सैलाब इस कदर भड़का कि कुछ ही घंटों में पूरा गांव एक खूनी रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। इस भीषण हिंसक संघर्ष में डीएसपी समेत दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनके सिर फटे और शरीर की हड्डियां टूटने की खबरें हैं। दर्जनों ग्रामीण भी इस हिंसा में जख्मी हुए हैं, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

​500 जवानों का अमला भी नहीं रोक पाया आदिवासियों का आक्रोश

​प्रशासन की हठधर्मिता और जबरन कब्ज़ा लेने की जिद ने आज पूरे सूरजपुर जिले को दहला दिया है। कार्रवाई को अंजाम देने के लिए लगभग 500 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ 4-5 जिलों का अतिरिक्त बल उतारा गया था। खुद सूरजपुर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) मौके पर मौजूद थे। इसके बावजूद, जनता के सुलगते गुस्से और लाठी-डंडों के आगे भारी-भरकम पुलिस फोर्स के होश उड़ गए।

​ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे लंबे समय से इस ज़मीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे थे, लेकिन बहरी और अंधी हो चुकी प्रशासनिक मशीनरी ने उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की। शुक्रवार को जैसे ही पुलिस बल ने गांव में धौंस जमाने की कोशिश की, ग्रामीणों ने मुख्य रास्तों को ब्लॉक कर दिया और आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।

​पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़, आगजनी और भगदड़

​देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो गई। दोनों तरफ से ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे ऐसे बरसे कि पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। उग्र भीड़ ने पुलिस के कई वाहनों और बसों को निशाना बनाते हुए उनमें भीषण तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश की। इस खूनी संघर्ष के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो प्रशासन की विफलता की खुली कहानी बयां कर रहे हैं।

​नए अधिकारियों की हठधर्मिता बनी आग में घी

​जिले में हाल ही में आए नए कलेक्टर और एसपी की कार्यशैली और आपसी सूझबूझ की भारी कमी ने इस सुलगती आग में घी का काम किया है। संवादहीनता और जल्दबाजी में उठाए गए तानाशाही कदमों ने आज ग्रामीणों को उग्र होने पर मजबूर कर दिया। पुलिस विभाग अब अपनी नाकामियों को छुपाने और लीपापोती करने में जुट गया है, लेकिन हकीकत यह है कि इस घटना ने पुलिस की साख को मिट्टी में मिला दिया है।

​प्रतापपुर-अंबिकापुर मार्ग पूरी तरह ठप, क्षेत्र में भारी तनाव

​घटना के बाद से आदिवासी समाज में ज़बरदस्त आक्रोश है। गुस्साए ग्रामीणों ने प्रतापपुर-अंबिकापुर मुख्य मार्ग पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम कर दिया है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो चुका है। पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी है। प्रतापपुर क्षेत्र इस वक्त दहशत और तनाव के साये में जी रहा है।

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