: अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज में अंधविश्वास का बोलबाला
Tue, Jun 5, 2018
सरगुजा- इक्किसवीं सदी के इस युग मे आज भी अंध्विश्वास का बोलबाला है, और इसकी गिरफ्त में ग्रामीण आज भी फंसे हुवे हैं। इसी बीच अंधविश्वास के पांव मेडिकल कॉलेज तक पहुंच आये हैं। दरअसल अम्बिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में घंटों तक झाड़फूंक का दौर चलता रहा।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में घंटों तक झाड़फूंक करने वाला शिव कुमार (बैगा) ने अपने आप को एक सिद्ध पुरुष बता रहा है। इतना ही नही इसका दावा है कि यह एक बार अगर किसी को भी झाड़ पुंक कर दे तो वह चाहे किसी भी बीमारी से पीड़ित हो वह ठीक हो जाता है। इतना ही नही इसका दावा है कि इसे भूत प्रेतों की पहचान है साथ ही यह इससे पीड़ित लोगों को उनसे मुक्त भी कराता है। इस आदमी का दावा भले ही जो भी हो लेकिन अब जो हम आप को बताने जा रहे हैं वह इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात है। दरअसल तंत्र क्रिया और झाड़ फूंक का खेल कहीं और नहीं बल्कि अम्बिकापुर के मेडिकल कॉलेज में चल रहा था।मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल का नज़ारा देखने लायक था। आज यहां चिकित्सकीय इलाज के साथ ही अंधविश्वास का खेल भी देखने को मिला। दरअसल मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड नंबर 3 में बतौली के ग्राम बोदा से बैगा एक मरीज का झाड़फूंक करने आया था। जानकारी के मुताबिग ग्राम बोदा निवासी एक 30 वर्षिय विरमोहन दो दिन पहले पेंड से गिर कर घायल हो गया था। जिसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लाकर दाखिल कराया गया था। इसी दौरान उसके घर के बगल में रहने वाले बैगा शिवकुमार ने बताया कि विरमोहन पर किसी भूतप्रेत का साया है। जिसके बाद उसके परिज बैगा को अस्पताल ले आये और विरमोहन का झाड़-फूंक कराने लगे। वहीं इस बात से बेखबर बने रहे मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन को जब यह जानकारी दी गई तो उसने मामले की जानकारी से साफ इंकार कर दिया।इक्कीसवीं सदी के इन दौर में अम्बिकापुर मेडिलकल कॉलेज अस्पताल में चौका देने वाला यह मामला प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही को उजागर कर रहा है। वही इस बात की भी तरफ इशारा कर रहा है कि अंधविश्वास उन्मूलन और जागरूकता के तमाम दावे अभी कागजों में ही सिमटे हुवे हैं, और उन्हें अभी अमल में लाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
: अटेम नदी पर बना अस्थाई पुल बहा
Mon, Jun 4, 2018
क्रांति रावत उदयपुरअम्बिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर अटेम नदी पर बना अस्थायी पुल बहने से मार्ग बंद हो गया है,जिससे दोनो तरफ गाडीयो की लंबी लाईन लगी हुई है,कल रात 11 बजे के बाद हल्की बारिश से अटेम नदी पर बना अस्थायी पुल बह गया,गौरतलब है कि इससे पहले भी अटेम पर बने अस्थाई पुल कई बार बह चुका है जिसके बाद भी प्रसाशन की नींद नही खुलता है लिहाजा पुल बह जाने से अम्बिकापुर-रायपुर बिलासपुर कोरबा सडक मार्ग का आवागमन बंद हो गया है!
: नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह देव के पहल पर ठेकेदार के चंगुल में फसे युवक हुए आजाद
Thu, May 31, 2018
अंबिकापुर-उदयपुर क्षेत्र में कोल खनन कार्य में लगी कंपनी अदानी द्वारा स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग के बाद कैंपस प्लेसमेंट के नाम पर राजस्थान के अलवर जिले की एक कंपनी में 20 युवाओं को कार्य के लिये भेजा गया था, जहां पर जाने के बाद युवा प्लेसमेंट ठेकेदार के चंगुल में फंस चुके थे, 12 घंटे का कार्य लेने वाली कंपनी को छोड़ कर युवा अपने घर वापस आना चाहते थे, किन्तु प्लेस्मेंट ठेकेदार द्वारा धमकी देकर जबरन उनसे कार्य कराया जा रहा है तथा मारपीट करने की बात की जा रही है, जिससे डरे उदयपुर क्षेत्र के युवाओं ने इसकी जानकारी नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह देव को दी थी, और शीघ्र घर वापसी हेतु आवश्यक उपाय करने आग्रह किया था।
नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह देव ने उक्त मामले पर संज्ञान लेते हुए तत्काल डीजीपी छ.ग.से मुलाकात कर लिखित में पत्र सौंपते हुए सरगुजा संभाग के युवाओं के घर वापसी हेतु आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया, जिसके बाद डीजीपी छ.ग. ने राजस्थान डीजीपी से चर्चा कर उक्त मामले में कार्यवाही हेतु आग्रह किया था। राजस्थान पुलिस द्वारा सक्रियता से कार्य करते हुए सभी युवाओं को तत्काल उक्त प्लेसमेंट ठेकेदार के फैक्ट्री से छुड़वा कर सकुशल छ.ग. हेतु रवाना किया गया। इधर नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह देव लगातार युवाओं के संपर्क में रहते हुए घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए थे। 31 मई की सुबह युवाओं ने नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह देव के कार्यालय में फोन पर जानकारी दी कि वे सभी राजस्थान से ट्रेन द्वारा छ.ग. के लिये प्रस्थान कर रहे हैं। सायं 5 बजे सभी युवा जबलपुर पहुंच चुके थे, जिसकी जानकारी उन्होंने नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह देव के कार्यालय को दी गई, उन्होंने बताया कि सुबह वे अम्बिकापुर पहुंच जायेंगे।
त्वरित कार्यवाही हेतु नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह देव ने डीजीपी छ.ग. एवं डीजीपी राजस्थान को धन्यवाद दिया है, उन्होंने कहा है कि यह बेहतरीन पुलिसिंग का एक उदाहरण है कि युवाओं को तत्काल राहत दी गई।