: विश्व रक्तदान दिवस पर महामाया शाखा ने किया रक्तदान शिविर का आयोजन
Fri, Jun 15, 2018
अंबिकापुर-अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच की ईकाई मारवाड़ी युवा मंच महामाया शाखा द्वारा विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर मेडिकल कालेज अस्पताल मे रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया,इस दोरान बड़ी संख्या में लोग रक्त दान किये! गोरतलब है कि मारवाड़ी युवा मंच की पुरे राष्ट्र में 26 प्रान्तो मे है 625 शाखाओं के माध्यम से एक ही दिन एक ही कार्यक्रम को संपादित किया गया है। मंच के अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रवाल ने बताया कि 14 जून तो एक बहाना हैं हमे पूरे देश को रक्तदान के लिये जगा रहे है।आज के इस आधुनिकता और सभ्यता के विकास की दौड मे मनुष्य कितना आगे निकल जाये लेकिन जरुरत पडने पर एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति को अपना रक्त देने मे हिचकिचाता है।इससे बडी विडम्बना और क्या हो सकती है कि अनेको दुर्घटनाओं मे रक्त की आपूर्ति समय पर न होने के कारण लिग असमय मौत के मुंह मे समा जाते है,इसी दर्द को हमारे युवा तुर्क प्रदेश अध्यक्ष श्री सुनील अग्रवाल ने समझा है और उनके निर्देशन मे पूरे प्रान्त की सभी शाखाओं ने एक साथ रक्तदान शिविर का आयोजन किया है। इस अवसर पर प्रान्तीय उपाध्यक्ष श्री अंशुल गोयल जी ने बताया कि युवा मंच के प्रत्येक सदस्यों ने यह संकल्प लिया है कि वे स्वयं तो रक्तदान करेंगे ही साथ ही दुसरो को प्रेरित भी करेंगे।अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच की ईकाई मारवाड़ी युवा मंच महामाया शाखा के रक्तदान शिविर में शाखा की सचिव श्रीमती बरखा अग्रवाल,नितिन अग्रवाल, विनय गुप्ता, रीशी अग्रवाल,माखन देवरी,अरविन्द मिश्रा,अनीस अंसारी,सुमित अग्रवाल, श्रीमती नेहा अग्रवाल, सुनील कुमार,विपिन अग्रवाल,प्रदीप अंटीलNYP हरियाणा, सुरेन्द्र सिंह NYP हरियाणा सहित अन्य लोगो ने रक्तदान किया।तथा लगभग 100 ऎसे लोगो ने अपना सम्पर्क सूञ शाखा को प्रदान किया जो समय पर रक्तदान हेतु उपलब्ध होंगे।रक्तदान शिविर में सभी रक्तदाताओ को प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।उपरोक्त रक्तदान शिविर में ब्लडबैंक प्रभारी श्री आजाद भगत और उनकी पुरी टीम का सक्रिय सहयोग रहा।
: शौचालय बना पंडो परिवार का सहारा,पेड़ के नीचे कटती है रात
Wed, Jun 13, 2018
राकेश मित्तल
अंबिकापुर- शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार की बातें तो रोज सामने आती हैं लेकिन यह किसी परिवार का सहारा बन गया है...ऐसी बात सामने आए तो आपको जरूर अटपटा लगेगा,लेकिन यह सच है और मामला है सरगुजा जिले के विकासखण्ड लखनपुर का जहां शौचालय एक पंडो परिवार के लिए आसरा है।इतना ही नहीं तेज हवा तूफान में घर उजड़ने के बाद पति पत्नी के साथ चार बच्चों वाले इस पंडो परिवार की रात पेड़ के नीचे गुजरती है।यह स्थिति पिछले कई महीनों से है लेकिन राष्ट्रपति दत्तक पुत्रों की सुध अभी तक किसी न नहीं ली है।
मिली जानकारी के अनुसार धर्मजीत पंडो सरगुजा जिले के विकासखण्ड लखनपुर के ग्रामपंचायत मांजा का निवासी है जहां पंडोपारा में वह अपनी बीबी और चार बच्चों के साथ कई वर्षों से निवास करता है।घर के नाम पर उसके पास एक छोटी से झोपडी थी जो कई महीनों पूर्व तेज हवा पानी में उजड़ गई थी। झोपड़ी के उजड़ने के बाद धर्मजीत पंडो के पास बीबी बच्चों को लेकर रहने की समस्या उत्पन्न हो गई और इसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे,तब ऐसी स्थिति में स्थिति में उसकी नजर घर के पास स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालय पर पड़ी।धर्मजीत पंडो ने इसके बाद कुछ नहीं सोचा और शौचालय को अपना सहारा बनाने का निर्णय लिया तथा घर का राशन सहित पूरा सामान ले जाकर शौचालय में रख दिया।उसने वहां सामान तो रख लिया लेकिन शौचालय में इतनी जगह नहीं थी कि वह वहां रसोई घर बना सके और सोने की व्यवस्था करे, तब उन्होंने शौचालय के बाहर ही चूल्हा बना दिया और उनमें खाना बनाने लगे। आज उनका पूरा शौचालय के बाहर ही खाना बनाते और खाते हैं।धर्मजीत की शौचालय में सामान रखने और उसके बाहर खाना बनाने खाने की व्यवस्था तो हो गई लेकिन अब उनके पास सोने और रहने की समस्या खड़ी हो गई तब उन्होंने घर के पास पेड़ के नीचे सोने रहने का फैसला लिया और अब उस पेड़ के नीचे उसके पूरे परिवार की रात कटती है,गर्मी,ठंड और बारिश सबका सामना उन्हें करना पड़ रहा है।पढ़ने और सुनने में यह अटपटा तो लग रहा है लेकिन यह सच्चाई है और राष्ट्रपति दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के पंडो परिवार के लिए आज शौचालय ही सहारा है,घर उजड़ने के बाद जिसमें गृहस्थी का पूरा सामान रखा है और इसी के बाहर उनके जीवन की पटरी दौड़ रही है।दूसरे तरफ इस पंडो परिवार की झोपड़ी उजड़े कई महीने हो गए लेकिन प्रशासन ने अब तक उनकी सुध ले राहत दिलाने का प्रयास नहीं किया है जबकि शौचालय को अपना आसरा बनाना किसी अचंभे से कम नहीं है,कमाल की बात तो यह भी है कि अब तक शौचालय में घर के बसाने की बात भी प्रशासन के कानों तक नहीं पहुंची है।बरहाल तेज हवा पानी में आशियाना उजड़ने के बाद स्वच्छ भारत मिशन के तहत बना शौचालय ही पंडो परिवार के लिए कई महीनों से आशियाना बना हुआ है,प्रशासन की उदासीनता उन्हें और कितने दिन इस स्थिति में रहने विवश रखती है देखने वाली बात है।
पंडो लोगों के साथ होने वाली ज्यादतियों से दुखी है समाज
कहने को तो पंडो राष्ट्रपति दत्तक पुत्र और विशेष पिछड़ी जाति है जिन्हें संविधान में विशेष दर्जा प्राप्त है तथा इनके विकास के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपये शान द्वारा खर्च किये जाते हैं।करोड़ों खर्च और विभिन्न योजनाओं के बावजूद पंडो जाति के लोगों का न तो सामाजिक स्तर सुधरा है और नहीं आर्थिक।पंडो जाति के लोगों के साथ प्रशानिक उपेक्षा की बातें भी आये दिन सामने आती हैं,इनके रहवास क्षेत्रों के विकास की बात हो,चिकित्सा सुविधा की बात या अन्य कोई मामला हमेशा उपेक्षित ही रहते हैं।सूरजपुर के ओड़गी ब्लॉक के विजनपाठ में गांव छोडने की चेतवानी के बाद भी शासन प्रशासन ने उन्हें गम्भीरता से नहीं लिया और स्थिति गांव की आज भी बददत्तर है,पंडोनगर के युवकों को बुरी तरह घायल होने के बावजूद चिकित्सा सुविधा नहीं मिली थी और अब शौचालय में सहारा लेने का मामला,आये दिन कोई न कोई नया मामला।प्रशासनिक रूप से विभिन्न तरीकों से पंडो जाति के लोगों के साथ उपेक्षा अब समाज के लोगों को तकलीफ देने लगी है,वे इसे उनके साथ ज्यादती के रूप में देखने लगे हैं क्योंकि उनके आर्थिक सामाजिक विकास के लिए आने वाले करोड़ो रूपये कागजों में खर्च करने के साथ शासन प्रशासन व्यवहारिक रूप से भी सकारात्मक रवैया नहीं अपनाता है जो उनके दुख का कारण बन गया है।समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवराम पंडों ने बताया कि सरगुजा संभाग में हमारी संख्या पंद्रह हजार से ज्यादा है लेकिन बदहाल स्थिति में हैं,कई बार शासन प्रशासन के समक्ष समाज के लोग गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई हमारी नहीं सुनता,अब अपने अधिकार के लिए संगठित हो आंदोलन का रास्ता ही उनके पास बचा है।
बारिश में शौचालय में दुबक जाता है पंडो परिवार
इस पंडो परिवार के लिए स्थिति उस समय भयानक हो जाती है जब उनके गांव में बारिश होने लगती है,ऐसी स्थिति में बच्चों के साथ सभी को शौचालय में ही दुबक कर रहना पड़ता है। जब बारिश ज्यादा होती है और रात का सोनर का समय होता है तो चारों बच्चों को धर्मजीत शौचालय के अंदर सुला देता है और खुद बीबी के साथ भींगते हुए पेड़ के नीचे खड़े रहता है।
गरीबी के कारण नहीं बना पा रहा घर
हवा तूफान में घरनुमा झोपड़ी के उजड़ जाने के बाद धर्मजीत गरीबी के कारण उसे फिर से बना नही पा रहा है। बताया जा है है कि झोपड़ी में खपरे के नीचे लगीं लकड़ियां सड़ गयी थीं जो अब किसी काम की नहीं हैं। गरीबी के कारण वह लकड़ी व अन्य जरूरत का सामान खरीद नहीं पा रहा है।हालांकि अब बारिश के मौसम को देखते हुए समाज की पहल पर गांव वाले मदद को तैयार हैं लेकिन यह मदद कब मिलेगी और कब धर्मजीत पंडों का आशियाना बनेगा फिलहाल यह निर्धारित नहीं है और इस पंडो परिवार को शौचालय के भरोसे ही समय निकालना पड़ेगा।दूसरी तरफ अगर आज सुबह समाज के शिवराम पंडों मांजा के पंडोपारा सामाजिक काम से नहीं जाते तो धर्मजीत के परिवार कर शौचालय को आशियाना बनाने की बात भी सामने नहीं आती जो विकास के लिए काम करने वाले प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनीधियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है जो बातें तो विकास और जनहित की करते हैं लेकिन वास्तविकता बिल्कुल विपरीत।
: पुहपुटरा की ज्योति बेला स्व सहायता समूह राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
Tue, Jun 12, 2018
अम्बिकापुर
- सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखण्ड अंतर्गत पुहपुटरा ग्राम के ज्योति बेला स्व सहायता समूह को उत्कृष्ट कार्य हेतु भारत शासन के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं राज्य मंत्री श्री रामकृपाल सिंह द्वारा स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती दुलेष्वरी राजवाड़े, सचिव श्रीमती गीता शर्मा को प्रमाण पत्र एवं एक लाख रूपए का चेक प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। इस दौरान केन्द्रीय ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी एवं लखनपुर जनपद की क्षेत्रीय समन्वयक ममता दास उपस्थित थीं। पुरस्कार प्राप्त होने पर अत्यंत हर्षित भाव से समूह की अध्यक्ष एवं सचिव ने जिला प्रषासन से प्राप्त मार्गदर्षन एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
कलेक्टर श्रीमती किरण कौषल ने ज्योति बेला स्व सहायता समूह को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होने पर शुभकामनाएं देते हुए आष्वस्त किया है कि समूह के उत्कृष्ट संचालन हेतु प्रषासन द्वारा समय-समय पर मार्गदर्षन एवं आवष्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने समूह की महिलाओं को सतत् रूप से उत्कृष्ट कार्य करने हेतु प्रेरित किया है। गौरतलब है कि भारत शासन के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा देष के 34 स्व सहायता समूहों का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया।
पुहपुटरा ग्राम में संचालित ज्योति बेला स्व सहायता समूह में 12 महिलाएँ पूरी सजगता एवं सक्रियता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। इन महिलाओं द्वारा किराना दुकान संचालन, ईट निर्माण एवं बकरीपालन का कार्य सफलतापूर्वक करते हुए अर्थोपार्जन किया जा रहा है। साथ ही इन महिलाओं द्वारा स्थानीय स्तर पर सामाजिक उŸारदायित्वों का भी निर्वहन किया जा रहा है। महिलाओं द्वारा अपने ग्राम सहित आसपास के ग्रामों में स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने एवं नषापान तथा सामाजिक बुराईयों से दूर रहने की प्रेरणा दी जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिषन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री प्रमोद शुक्ला ने बताया है कि समूह की महिलाओं द्वारा नियमित रूप से लेखा संधारण एवं निष्चित अंतराल पर बैठकों का आयोजन सहित अन्य नियमों का विधिवत पालन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष लखनपुर जनपद अंतर्गत बेलखरिखा ग्राम की रानी लक्ष्मी बाई ग्राम संगठन को रांची में 5 मई को आयोजित सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।