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: नवीन कानून पर कार्यशाला का आयोजन, डॉक्टर, नर्स व पैरामेडिकल स्टाफ को दी जानकारी...

Admin

Sat, Apr 12, 2025

सौरभ द्विवेदी

सूरजपुर. 1 जुलाई 2024 से देशभर में 3 नए आपराधिक कानून अमल में आ चुके है। इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न पहलुओं से डॉक्टर, नर्स व पैरामेडिकल स्टाफ को अवगत कराने कार्यशाला का आयोजन किया गया। आज जिला पुलिस कार्यालय के सभाकक्ष में नए कानूनों पर कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष महतो के द्वारा जिला चिकित्साल के डॉक्टर, नर्स व पैरामेडिकल स्टाफ को नए कानून के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए इस विषय पर चर्चा कर कहा कि 1 जुलाई 2024 से नवीन तीनों कानून के तहत कार्य किए जा रहे है, पुराने कानून की जगह अब नए कानून के तहत कार्य किया जा रहा है। पुलिस एवं चिकित्सक तथा चिकित्सीय क्षेत्र से जुड़े सभी इनका अच्छी तरह अध्ययन करें जिससे इनका जनहित में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस का प्रमुख काम अपराध होने से पहले ही रोकना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस की अपराध विवेचना सहित घायलों को चिकित्सीय उपचार, मुलाहिजा व पोस्ट मार्डम में डॉक्टर व उनकी टीम का बड़ी महत्वपूर्ण कार्य होता है जिसमें सहयोग करने की बात कही। डीएसपी रितेश चौधरी ने जानकारी देते हुए कहा कि नए कानूनों में ऐसे बहुत से प्रावधान हैं, जो पुलिस को पहले से ज्यादा ताकतवर बनाते हैं। मसलन- पुलिस अब आरोपी को 90 दिन तक हिरासत में रख सकती है, पहले ये अवधि 15 दिन थी। बीएनएसएस के चैप्टर 13 के सेक्शन 173 में प्रावधान है कि पुलिस अधिकारी को किसी संगीन मामले की शिकायत मिलने पर प्रथम सूचना पत्र लिखने से पहले अपने सीनियर ऑफिसर से अनुमति लेकर 14 दिन की प्राथमिक जांच करनी होगी।’ यानी पुलिस अधिकारी को 14 दिन का समय मिलेगा, जिसमें वो तय करेगा कि मामले में प्रथम दृष्टया केस बनता है या नहीं। प्रत्येक दिवस पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों की जानकारी सभी थाना-चौकी व पुलिस कंट्रोल रूम के नोटिस बोर्ड में चश्पा किए जाने के बारे में बताया। डीएसपी मुख्यालय महालक्ष्मी कुलदीप ने नए कानून के तहत जांच करने की शक्ति के बारे में बताया और कहा कि पुलिस को किसी मामले की जांच करने का अधिकार प्राप्त है। पुलिस मामले से जुड़े सबूतों, बयानों और वस्तुओं को भी इकट्ठा कर सकती है। साथ ही न्यायालय पुलिस को मामले की जांच करने के लिए आदेशित कर सकती हैं। बीएनएसएस में इसका जिक्र चैप्टर 13 के सेक्शन 173 से लेकर 196 तक है। बीएनएसएस के सेक्शन 43(3) के तहत पुलिस अधिकारी अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय या ऐसे व्यक्ति को अदालत में पेश करते समय हथकड़ी का इस्तेमाल कर सकता है। इस दौरान थाना प्रभारी सूरजपुर विमलेश दुबे, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. अजय मरकाम, जिला चिकित्सालय के स्टाफ नर्स व पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहे।

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