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करोड़ों की लागत से बन रहे एकलव्य आवासीय विद्यालय में भ्रष्टाचार का खेल, मानकों को ताक पर रखकर हो रहा निर्माण

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भ्रष्टाचार का खेल : करोड़ों की लागत से बन रहे एकलव्य आवासीय विद्यालय में भ्रष्टाचार का खेल, मानकों को ताक पर रखकर हो रहा निर्माण

Rajesh Soni

Wed, May 20, 2026

सूरजपुर । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवास देने के उद्देश्य से शुरू किया गया 'एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय' अब लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत सरनापारा में करीब 38 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन इस विद्यालय भवन में तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का भविष्य अंधकार में है।

तकनीकी मानकों की अनदेखी: बिना बेस ढलाई के ही खड़ी की जा रही छत

​वर्तमान में विद्यालय के किचन ब्लॉक का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसे लेकर गंभीर तकनीकी सवाल खड़े हो गए हैं।

कमजोर फाउंडेशन: बिना नीचे बेस ढलाई किए ही ऊपर सेंटरिंग कर सीधे छत ढलाई का कार्य किया जा रहा है।

नियमों का उल्लंघन: तकनीकी मानकों के अनुसार ढलाई के लिए लगाई जाने वाली सरिया जाली (Iron Mesh) की दूरी अधिकतम 6 इंच होनी चाहिए, लेकिन यहाँ इसे 9 से 10 इंच की दूरी पर बांधा गया है।

अमानक सामग्री: निर्माण कार्य में विशेषज्ञों की राय के विपरीत बेहद कमजोर माने जाने वाले महज 8 एमएम (8mm) के सरियों का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिससे पूरे भवन की मजबूती संदिग्ध हो गई है।

लोहे की जगह बांस-लकड़ी का सहारा, मजदूरों की जान भी जोखिम में

​निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आलम यह है कि भारी ढलाई के लिए जहाँ लोहे के मजबूत सपोर्ट सिस्टम (Iron Jacks) का उपयोग होना चाहिए, वहाँ बांस और लकड़ियों के सहारे सेंटरिंग टिकी हुई है।

मौके पर मची अफरा-तफरी: सूत्रों के अनुसार, जब मीडिया की टीम ग्राउंड जीरो पर पड़ताल करने पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। आनन-फानन में ढलाई कार्य को रोक दिया गया और मजदूरों को वहां से हटा दिया गया, जो कार्य की अपारदर्शिता को साफ बयां करता है। इसके अलावा, साइट पर किसी भी जिम्मेदार तकनीकी इंजीनियर की नियमित मौजूदगी नहीं रहती है। निर्माण कार्य पूरी तरह श्रमिकों के भरोसे चल रहा है, जिन्हें हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या बूट्स जैसे बुनियादी सुरक्षा उपकरण भी मुहैया नहीं कराए गए हैं।

​राजनीतिक संरक्षण और पुरानी शिकायतों पर चुप्पी का आरोप

​ग्रामीणों का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब इस निर्माण कार्य पर उंगली उठी हो। इससे पहले भी घटिया निर्माण सामग्री, प्लास्टर में सीमेंट की कमी और अवैध रेत के इस्तेमाल को लेकर खबरें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार को कथित तौर पर ऊंचे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण प्रशासन बार-बार मिल रही शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई करने से बच रहा है।

​हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी हादसे की पुनरावृत्ति का डर

​स्थानीय निवासियों ने कुछ वर्ष पूर्व सरनापारा स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुए हादसे का हवाला देते हुए गहरा आक्रोश जताया। वहां भी करोड़ों की लागत से बने क्वार्टर नंबर 6 की छत का प्लास्टर गिरने से एक कोर्ट कर्मचारी की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि इस ₹38 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट की उच्चस्तरीय जांच नहीं की गई, तो भविष्य में यहाँ पढ़ रहे मासूम आदिवासी बच्चों के जीवन के साथ कोई बड़ा खिलवाड़ हो सकता है।

​प्रशासनिक प्रतिक्रिया

"पूर्व में मिली शिकायतों के बाद एक जांच टीम गठित कर मौके का निरीक्षण कराया गया था, जिसमें तकनीकी कमियां और गुणवत्ता संबंधी खामियां पाई गई थीं। इसकी रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी जा चुकी है। अब पुनः आपके (मीडिया के) माध्यम से नई गड़बड़ियों की जानकारी मिली है। इसे अत्यंत गंभीरता से लेते हुए मैं स्वयं तत्काल मौके का निरीक्षण करूंगी और पूरी वस्तुस्थिति की रिपोर्ट कलेक्टर महोदय को सौंपकर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"

​— ललिता भगत, एसडीएम, प्रतापपुर


स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग

​अब ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय तकनीकी एजेंसी से जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार, लापरवाह इंजीनियरों व संबंधित अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग पर अड़े हैं।

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