: बर्खास्त आरक्षक से मिलने जेल पहुंचे गृहमंत्री- गृहमंत्री रामसेवक पैकरा
Sat, Jun 30, 2018
प्रवेश गोयल
रायपुर- पुलिस परिवार के आन्दोलन को हवा देने के आरोप में देशद्रोह की धाराओं में जेल भेजे गए राकेश यादव से प्रदेश के गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने केन्द्रीय जेल में जाकर भेट की। जेल के भीतर हुई ये मुलाकात लगभग आधे घंटे चली। इस दौरान पुलिस और जेल के कुछ बड़े अधिकारी भी उपस्थित थे। जेल में रेशम विभाग द्वारा आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेने के बाद गृहमंत्री की यादव से भेंट हुई। इस भेट को लेकर पुलिस विभाग में खासी चर्चा हो रही है। जेल सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच पुलिस सुधार को लेकर बात हुई है। वही, सोशल मीडिया में लोग कह रहे हैं कि पुलिस परिवारों की एकजुटता का ही परिणाम है कि जिस व्यक्ति को पहले सिस्टम ने देशद्रोह बताकर बुक कर दिया था, आज उसी व्यक्ति से संवाद करने के लिए प्रदेश के गृहमंत्री को बाध्य होना पड़ रहा है!
बता दें कि 25 जून को हुए आन्दोलन के दो दिन पहले से ही पुलिस ने राकेश को गिरफ्तार कर लिया था। जेल भेजे जाने के बाद से राजेश यादव जेल में ही अनशन पर बैठे हुए हैं। इधर, आन्दोलन के दौरान पुलिस परिवार की अभूतपूर्व एकजुटता से सरकार के समक्ष भी परेशानी खड़ी होने लगी है। चुनावी साल में पुलिस परिवारों की मांगों की अनदेखी करना भाजपा को भारी पड सकता है। इसे देखते हुए पहले इनकी मांगों को लेकर सरकार विचार करने में जुटी हुई है। इसी क्रम में उस दौरान बनी परिस्थितियों से अप्रसन्न हुए आन्दोलन के अगुवाओं को साधने का काम किया जा रहा है। गृहमंत्री की राकेश यादव से हुई भेट को भी इसी सन्दर्भ में देखा जा रहा है।
: 1 जुलाई से इन 9 शर्तों पर होगा शिक्षाकर्मियों का संविलियन
Sat, Jun 30, 2018
प्रवेश गोयल
रायपुर- शिक्षाकर्मियों के संविलियन का चिर प्रतिक्षित आदेश आज जारी कर दिया। मुख्यमंत्री ने इस आदेश के जारी करने का ऐलान किया। शिक्षाकर्मियों की संविलियन की प्रक्रिया कल से शुरू हो जायेगी, इसके लिए प्रारंभिक जो शर्तें तैयार की गयी है, उनमें 9 बिंदु तैयार किये गये हैं। शिक्षाकर्मियों को किन पात्रता के अनुरूप वेतन और सुविधाएं दी जायेगी, वहीं उनकी सेवा की गणना भी 1 जुलाई 2018 से किया जायेगा। स्कूल शिक्षा सचिव के आदेश से जारी पत्र में जिन शर्तों का उल्लेख किया गया है। उनमें कहा गया है कि शिक्षाकर्मी अब स्कूल शिक्षा विभाग में लोकल बाडी शिक्षक के पदनाम से जाने जायेंगे। वहीं शिक्षा विभाग में पदस्थ शिक्षक और संविलियन के बाद शिक्षा विभाग के अधीन आ रहे शिक्षक का कैडर अलग-अलग होगा।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय (महानदी भवन) से जारी आदेश के अनुसार संविलियन की शर्तें इस प्रकार हैं – (1) संविलियन किए गए शिक्षक (पंचायत/नगरीय निकाय) संवर्ग स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक (एलबी) के नाम से जाने जाएंगे। (2) स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत पूर्व से संचालित शालाओं में जहां ई-संवर्ग के शिक्षक पदस्थ हैं, उन शालाओं में पदस्थ पंचायत एवं नगरीय निकाय संवर्ग के शिक्षक नवीन नाम एलबी संवर्ग के तथा जहां टी – संवर्ग के शिक्षक पदस्थ हैं, उन शालाओं में पदस्थ पंचायत एवं नगरीय निकाय संवर्ग के शिक्षक नवीन नाम – शिक्षक टी (एलबी) संवर्ग के अंतर्गत होंगे और इनका कैडर अलग-अलग होगा। (3) शिक्षक (एलबी) संवर्ग को एक जुलाई 2018 से सातवे वेतन आयोग की राज्य शासन द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अनुशंसाओं के अनुरूप वेतन और अन्य सुविधाएं देय होंगी। (4) शिक्षक (एलबी) संवर्ग को देय समस्त लाभ के लिए सेवा की गणना संविलियन की तारीख एक जुलाई 2018 से की जाएगी। (5) दिनांक 01 जुलाई 2018 की पहले की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के एरियर्स की पात्रता नहीं होगी। (6) शिक्षक (एलबी) संवर्ग को नवीन अंशदायी पेंशन योजना की पात्रता होगी। (7) शिक्षक (एलबी) संवर्ग की भर्ती, पदोन्नति और सेवा के नियम स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अलग से बनाकर अधिसूचित किए जाएंगे। (8) किसी भी अन्य विभाग के सेवा एवं भर्ती नियमों में यदि इस आदेश के तहत निर्मित नियमों से असंगत कोई नियम अथवा प्रावधान हो, तो वे नियम या प्रावधान इस आदेश के प्रावधानों की सीमा तक संशोधित माने जाएंगे। संबंधित विभाग इस आदेश के प्रावधानों से संगत अनुकूलन आदेश अपने सेवा भर्ती नियमों में अविलम्ब शामिल कराएगा और (9) शिक्षक (पंचायत/नगरीय निकाय) संवर्ग के जारी नियुक्ति आदेश के विरूद्ध यदि किसी न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है, तो उनका संविलियन न्यायालय के निर्णय के अध्याधीन रहेगा।
: सरगुजा-बस्तर से सबसे ज्यादा पुलिस परिवार के आने के संकेत
Sun, Jun 24, 2018
रायपुर
- राजधानी में 25 जून को घोषित पुलिस परिवार के आंदोलन में सरगुजा और बस्तर से सबसे ज्यादा पुलिस परिवारों के संकेत हैं। पुलिस ने इस इनपुट के आधार पर आंदोलन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का फैसला किया है। बस्तर और सरगुजा से यहां संपर्क रखने वालों का पता लगाया जा रहा है। मुख्यालय स्तर पर इस मामले में कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षकों को फ्री हैंड किया जा चुका है। पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट संकेत हैं कि वे पुलिस परिवार के आंदोलन को रोकने के लिए अपने स्तर पर हर तरह का निर्णय ले सकते हैं।
जगदलपुर
- पुलिसकर्मियों के परिवार के आंदोलन में जबरन नाम घसीटने, पति के तबादले और फिर पुलिस कॉलोनी का क्वार्टर खाली करने का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए आरक्षक की पत्नी ने जगदलपुर में फांसी लगाने का प्रयास किया। शुक्रवार को 15 पुलिसकर्मियों का का तबादला नक्सल प्रभावित इलाकों में किया गया था। शनिवार को इनका मकान खाली करने का आदेश जारी हो गया। इनमें परपा थाने में तैनात आरक्षक भी है। मालेवाही कैंप में तबादले के बाद आड़ावाल पुलिस कॉलोनी का घर खाली करने का फरमान आ गया। उसकी पत्नी अफसरों के पास गुहार लगाने पहुंची, बताया कि उसके परिवार का कोई सदस्य आंदोलन में शामिल नहीं हुआ था, फिर भी पति का तबादला कर दिया गया और अब मकान खाली करवाया जा रहा है। जब किसी ने उसकी नहीं सुनी तो वह एनजीओ मेस स्थित पुलिस लाइन में अपने देवर के घर पहुंची। वहीं एक कमरे में फांसी लगाकर जाने देने की कोशिश की, ऐन वक्त पर महिला की देवरानी ने उसे ऐसा देख लिया और किसी तरह बचाया। उसे एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
पुलिस आन्दोलन पर बोले सीऍम
तो वही छ०ग० के मुख्यमंत्री डा०रमन सिंह ने कहा कि पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण
है डीजी आईजी अपने स्तर पर देख रहे है मुझे नहीं लगता किसी आन्दोलन की भूमिका बनेगी!