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: सरकार की यह कैसी शिक्षा नीति... बिना अक्षरज्ञान के नेत्रहिन सुखमेन पहुंची कक्षा आठवीं में

Admin

Sat, Jul 21, 2018
प्रवेश गोयल सूरजपुर- शासन की अव्यवहारिक योजना से दृष्टि बाधित सुखमेन बगैर किसी अक्षर ज्ञान के 8 वीं तक तो पहुंच गई, लेकिन आगे की पढ़ाई उसके लिए परेषानी का कारण बनी हुई है, यदि स्कूल के षिक्षक और परिजन समय रहते उसे नेत्रहिन षिक्षा केन्द्र में दाखिला दिला देते तो शायद सुखमेन को पछताना नहीं पड़ता। गौरतलब है कि जिले के प्रतापपुर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम करसी स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में कक्षा 8 वीं की छात्रा सुखमेन पैकरा पिता षिवनाथ पैकरा दोनों आंखों से दिव्यांग है, दृष्टि बाधा होने के बावजूद उसकी याददाश्त तो बहुत तेज है, लेकिन उसे अक्षरों का ज्ञान तनिक भी नहीं है। उसका कारण यह है कि शासन की नीतियों के अनुरूप बगैर किसी ज्ञान के उसे हर साल उत्तीर्ण कर दिया गया। पहली से आठवीं तक वह शासन की इसी अव्यवहारिक नीति के कारण पहुंच तो गई, लेकिन अब उसे आगे की पढ़ाई के लिए बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुखमेन को है फरिश्ते का इंतजार नेत्रहिन सुखमेन पैकरा को अगर प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही कक्षा पहली से किसी नेत्र दिव्यांग विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया होता तो जिन परिस्थितियों से सुखमेन आज गुजर रही है शायद उसे उन परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। सही समय पर सही मार्गदर्शन और पहल न होने का खामियाजा सुखमेन को भुगतना पड़ रहा है। अक्षर ज्ञान से वंचित सुखमेन अब आगे की पढ़ाई कैसे करेगी इन चिंताओं से ग्रस्त है। उसे किसी ऐसे फरिश्ते का इंतजार है जो अक्षर ज्ञान के साथ ही आगे की पढ़ाई जारी रखने में उसकी मदद कर दे।

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