रोड बना 'सब्जी मंडी' : प्रशासन 'साइलेंस मोड' पर: क्या किसी हादसे का है इंतजार?
Rajesh Soni
Sun, Jul 19, 2026
सूरजपुर का 'सब्जी-वे'
सूरजपुर: जिला मुख्यालय का मुख्य मार्ग इन दिनों आवागमन के लिए नहीं, बल्कि 'सब्जी और अतिक्रमण के अद्भुत संगम' के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। अग्रसेन चौक से लेकर कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तक का यह रास्ता सड़क कम और स्थानीय सब्जी मंडी ज्यादा नजर आता है। यहाँ सब्जी विक्रेताओं और सड़क पर टेढ़े-मेढ़े खड़े वाहनों के बीच से होकर गुजरना किसी साहसिक खेल से कम नहीं है।
कलेक्टर की नाराजगी और प्रशासनिक 'अमृत मंथन'
कुछ दिन पहले जिले के कलेक्टर महोदया ने इस मार्ग का दौरा किया था। उन्होंने सड़क पर बिखरे अतिक्रमण को देखकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और इसे हटाने का सख्त निर्देश दिया। लेकिन नगर प्रशासन ने इन निर्देशों को शायद 'आध्यात्मिक' रूप से लिया है—यानी सुना तो, पर अपनाया नहीं। कलेक्टर के आदेशों की 'एक्सपायरी डेट' संभवतः सब्जी के उन पत्तों से भी कम निकली, जो सड़क पर पड़े रद्दी में तब्दील हो गए हैं।
छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे 'जाम'
विद्यालय की छुट्टी का समय यहाँ का सबसे रोमांचक मोड़ होता है। एक तरफ स्कूल से बाहर निकलती छात्राओं की भीड़, और दूसरी तरफ अपनी कार को सब्जी की टोकरी के पास पार्क करने की ज़िद पाले हुए 'वीआईपी' ग्राहक। स्थिति इतनी गंभीर है कि छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए अपनी जान हथेली पर लेकर निकलना पड़ता है। अभिभावक चिंतित हैं, लेकिन प्रशासन की नींद शायद किसी भारी-भरकम बजट वाली योजना के बिना खुलने वाली नहीं है।
नगरपालिका की कार्रवाई: एक 'रिश्ते' की तरह अटूट
नगरपालिका जब भी अतिक्रमण हटाती है, तो लगता है कि जैसे कोई रस्म अदायगी हो रही हो। यह कार्रवाई ठीक वैसे ही समाप्त होती है, जैसे कोई सरकारी फाइल बंद हो जाती है। टीम गई, दो-चार लाठियाँ चटकाईं, और टीम के मुड़ते ही दुकानें फिर से अपनी 'शाही जगह' पर विराजमान हो जाती हैं। मानो अतिक्रमण और सड़क के बीच कोई अटूट प्रेम संबंध हो, जिसे तोड़ना किसी के वश में नहीं।
सूरजपुर का 'सब्जी-वे':
इस पूरे प्रकरण पर जब नगर पालिका के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने बड़े ही 'पेशेवर' अंदाज में अपना मोबाइल ही बंद कर लिया। शायद कलेक्टर के निर्देशों का अनुपालन किस फाइलों की धूल में दबा है, इसका जवाब उनके पास भी नहीं था। क्या शहर को तब तक इंतजार करना पड़ेगा जब तक कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए? या फिर प्रशासन तब जागेगा जब कोई नेता जी का काफिला इसी 'सब्जी-वे' में फंसकर घंटों तक सब्जी के भाव पूछेगा? फिलहाल, सूरजपुर की जनता सड़क पर सब्जी खरीदने और जान बचाने की मशक्कत एक साथ कर रही है।
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