रहस्यमयी खुजली आतंक : सरकारी स्कूल में एक हफ्ते से सहमे हैं बच्चे-शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से आक्रोश
Rajesh Soni
Thu, Jul 30, 2026
सूरजपुर। जिले के दूरस्थ चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत महुली स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में इन दिनों एक अजीबोगरीब और रहस्यमयी समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। पिछले एक सप्ताह से स्कूल के बच्चे और शिक्षक एक गंभीर व रहस्यमयी खुजली की चपेट में हैं। स्थिति इतनी डरावनी हो चुकी है कि अभिभावकों ने डर के मारे बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है, जिससे नौनिहालों की पढ़ाई पर ग्रहण लग गया है।
एक हफ्ते से खौफ का माहौल: स्कूल पहुंचते ही बच्चों और शिक्षकों के शरीर पर तेज खुजली, लाल चकत्ते और गंभीर एलर्जी के लक्षण उभर रहे हैं।
अभिभावकों में भारी नाराजगी: घटना की सूचना के एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची है।
पढ़ाई ठप: डर के कारण कई विद्यार्थियों ने स्कूल आना छोड़ दिया है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
क्लासरूम बनते जा रहे हैं मुसीबत का सबब
ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन के अनुसार, विद्यालय पहुंचते ही बच्चों के हाथ, पैर और गर्दन पर अचानक तेज खुजली शुरू हो जाती है। देखते ही देखते शरीर पर लाल धब्बे और चकत्ते उभर आते हैं। कई बच्चों की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि उन्हें बीच में ही स्कूल छोड़कर घर भागना पड़ता है। यही नहीं, कुछ शिक्षक भी इस अज्ञात संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
विद्यालय के प्रधान पाठक अखिलेश पटेल का कहना है कि कक्षाओं में नियमित फिनाइल और कीटाणुनाशक दवाओं से सफाई कराई जा रही है, इसके बावजूद हर रोज 2 से 4 बच्चों में यह समस्या सामने आ रही है। परिसर में संचालित प्राथमिक शाला के बच्चों में भी ऐसे ही लक्षण मिलने से आशंका है कि पूरा स्कूल परिसर इसकी गिरफ्त में है।
जहरीले कीड़े या एलर्जी: क्या है मुख्य वजह?
ग्रामीणों का अनुमान है कि स्कूल परिसर के आसपास मौजूद पुराने महुआ और आम के पेड़ों से बरसात के मौसम में रोएंदार या विषैले कीड़े नीचे गिरते हैं, जिनके संपर्क में आने से बच्चे एलर्जी और खुजली का शिकार हो रहे हैं। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि किसी चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती पर उठे सवाल
सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। एक सप्ताह पहले सूचना मिलने के बावजूद अब तक न तो कोई मेडिकल टीम स्कूल पहुंची है और न ही परिसर में कीटनाशक स्प्रे का छिड़काव किया गया है।
अभिभावकों और ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
तत्काल स्वास्थ्य शिविर: स्कूल में मेडिकल टीम भेजकर सभी बच्चों और शिक्षकों की त्वरित जांच हो।
कीटनाशक छिड़काव: पूरे स्कूल परिसर में प्रभावी स्प्रे कराकर संक्रमण के स्रोत को नष्ट किया जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: सूचना के बाद भी लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अमले की जवाबदेही तय हो।
फिलहाल, बीमार बच्चों की आह और अभिभावकों का गुस्सा जिला प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है। सबकी निगाहें अब स्वास्थ्य विभाग की सुस्त चाल पर टिकी हैं कि आखिर नींद से जागकर प्रशासन कब कार्रवाई करता है।
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