बच्चों के चावल पर 'खाकी' की बिरयानी : आंगनबाड़ी में सेंध, चौकी में समाधान, बच्चों के निवाले पर लग गया ‘समझौते’ का ठप्पा
Subhas Gupta
Fri, Oct 30, 2026
सूरजपुर। 'चोर-चोर मौसेरे भाई' वाली पुरानी कहावत अब आउटडेटेड हो चुकी है; सूरजपुर के मोहरसोप में नया मुहावरा लॉन्च हुआ है— 'चोर और खाकी, पक्के साढ़ू भाई!' मामला इतना चटपटा और शर्मनाक है कि नौनिहालों के पेट पर डाका डालने वाले चोर अब सीना तानकर घूम रहे हैं और कानून हाथ में झुनझुना लेकर तमाशा देख रहा है।
ताला टूटा, चावल छूटा और पुलिस का 'समझौता एक्सप्रेस' छूटा
मोहरसोप के पटेलपारा आंगनबाड़ी केंद्र में मासूम बच्चों के पोषण के लिए रखा ढाई क्विंटल (250 किलो) चावल 20 सितंबर की रात 'गायब' हो गया। कार्यकर्ता सोनकुंवर ने सोचा कि पुलिस के पास जाएंगी तो चोर सींखचों के पीछे होंगे। बेचारी अर्जी लेकर मोहरसोप चौकी पहुंचीं, लेकिन वहां तो अलग ही 'पंचायत' चल रही थी। पुलिस ने न एफआईआर काटी, न पावती दी; अलबत्ता कार्यकर्ता को ही ज्ञान पेल दिया— "अरे मैडम, गांव का मामला है, काहे बात बढ़ाती हो!" और झटपट कागज पर दस्तखत करवाकर मामले को रफा-दफा करने का 'महा-ऑफर' दे दिया।
गणित ऐसा कि आइंस्टीन भी सिर पीट लें: 250 में से 140 वापस, बाकी का 'हवन'?
पुलिस ने तीन नामी उस्तादों—अनिल, भीम और दारा को हिरासत में तो लिया, पर खाकी का दिल इतना पसीजा कि 250 किलो में से सिर्फ 140 किलो चावल बरामद कराकर इतिश्री कर ली। जब कार्यकर्ता ने पूछा कि "साहब, बाकी का 110 किलो चावल कहां गया? क्या चूहे खा गए?", तो चौकी से ऐतिहासिक डायलॉग दागा गया— "अरे सरकारी चावल है, जितना मिला उतने में संतोष करो, बाकी का हिसाब ऊपर वाला रखेगा!"
बाइक बिकी, 'लक्ष्मी' बरसी और कानून ने आंखें मूंद लीं!
गांव में चर्चा नहीं, बल्कि ढोल पीटकर बताया जा रहा है कि खाकी की इस मेहरबानी का सीक्रेट क्या है। आरोप है कि मुख्य आरोपी अनिल ने गांव की किराना दुकान में अपनी बाइक ₹40,000 में गिरवी रखी और बाकी दोनों सहयोगियों ने ₹5-5 हजार की 'सेवा दक्षिणा' भेंट की। इधर 'गांधी जी' की कृपा बरसी, उधर दो आरोपी तो चौकी की दहलीज से ही बाइज्जत विदा हो गए और मुख्य आरोपी को बाहर ले जाने की ऐसी नौटंकी हुई कि वह सीधे अपने घर पहुंचा।
"हमारा कोई क्या उखाड़ेगा, पुलिस अपनी जेब में है!"
अब आलम यह है कि बच्चों के निवाले पर डाका डालने वाले ये 'महानुभाव' गांव की गलियों में कॉलर ऊंची करके टहल रहे हैं और ताव दे रहे हैं कि जब चौकी अपनी मुट्ठी में है, तो कोई उनका क्या बिगाड़ लेगा? इधर बदहवास आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अब बड़े अफसरों की चौखट पर सिर पटक रही हैं कि साहब, कम से कम वो गायब 110 किलो चावल और खाकी की इस 'अद्भुत डील' का सच तो सामने ला दो!
अब देखना यह है कि आला हुक्मरान इस 'खाकी-चोर सिंडिकेट' की जांच करवाते हैं या फिर इस मामले को भी 'सरकारी चावल' समझकर हजम कर लिया जाएगा!
विज्ञापन
विज्ञापन