कागजों में बहती विकास गंगा : डिजिटल इंडिया के हाईवे पर, चौकापारा का 'दलदली एक्सप्रेस-वे'!
Rajesh Soni
Sun, Jul 26, 2026
सड़क न होने से नरकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण: कीचड़ से अटे रास्ते पर चलने को विवश 300 परिवार
सूरजपुर: एक तरफ देश अंतरिक्ष में परचम लहरा रहा है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य लिख रहा है, और बुलेट ट्रेन के सपने बुने जा रहे हैं; वहीं सूरजपुर जिले के चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिहारपुर स्थित चौकापारा में साल 2026 भी अपने पूरे शबाब पर है—यानी विकास के नाम पर वही पुराना, भरोसेमंद और पारंपरिक कीचड़ और दलदल!
यहाँ के 300 परिवारों के लिए 'विकास' शब्द किसी साइंस फिक्शन फिल्म की तरह है, जिसे उन्होंने सिर्फ सुना है, देखा कभी नहीं।
खटिया पर 'वीआईपी' सफर और जानलेवा स्टंट
रोमांच से भरपूर स्कूल का रास्ता: बच्चे रोज सुबह स्कूल नहीं जाते, बल्कि किसी खूूंखार जंगल के सफर पर निकलते हैं, जहाँ हर कदम पर कीचड़ का दलदल उनका स्वागत करने के लिए तैयार बैठा रहता है।
एम्बुलेंस फेल, खटिया पास: सरकार के आधुनिक स्वास्थ्य दावों की उस समय धज्जियां उड़ जाती हैं, जब बीमार मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस के पहिये नहीं, बल्कि ग्रामीणों के कंधों और खटिया का टायरलैस मॉडल इस्तेमाल करना पड़ता है।
प्रशासनिक कलाकारी: "मौसम का इंतजार"
जब इस अनोखे 'नो-रोड जोन' पर पंचायत के नुमाइंदों से सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब किसी कॉमेडी शो के पंचलाइन से कम नहीं था:
"रोड का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है, बस मौसम साफ होते ही काम शुरू होगा!"
ग्रामीणों का माथा ठनकना लाजिमी है, क्योंकि ठीक पिछले साल भी बरसात आने से पहले यही रिकॉर्ड बजाया गया था—फर्क सिर्फ इतना है कि उस साल भी धरातल पर एक कंकड़ या एक चुटकी मुरम नहीं गिरी थी। अब चौकापारा के इन 300 परिवारों का सिस्टम से सीधा सवाल है क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के प्रकट होने का इंतजार कर रहा है?
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