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आयुष चिकित्सालय परिसर की 'साफ-सफाई' की पोल"इलाज के लिए आएं, मलेरिया ले जाएं

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नया 'पर्यटन स्थल' : आयुष चिकित्सालय परिसर की 'साफ-सफाई' की पोल"इलाज के लिए आएं, मलेरिया ले जाएं

Rajesh Soni

Sun, Jul 19, 2026

"प्रशासन के निर्देश बेअसर, अस्पताल का परिसर अब बना बीमारियों का हेडक्वार्टर"

सूरजपुर: जिला मुख्यालय स्थित आयुष चिकित्सालय परिसर में स्वास्थ्य विभाग ने इलाज की एक अनूठी पद्धति विकसित की है। यहाँ चिकित्सालय परिसर अब एक 'अघोषित तालाब' में तब्दील हो चुका है, जहाँ मरीज इलाज कराने के बजाय मच्छरों के साथ 'मौन संवाद' करने को मजबूर हैं।

'वाटर-थीम पार्क' जैसी सुविधा, पर पानी निकासी नदारद

हल्की बारिश होते ही यह परिसर किसी लग्जरी वाटर-थीम पार्क का आभास देने लगता है। जल निकासी की कोई व्यवस्था न होना इस परियोजना की सबसे बड़ी 'विशेषता' है। परिसर में जमा गंदा पानी स्थानीय लोगों के लिए किसी एडवेंचर स्पोर्ट्स से कम नहीं है, जहाँ उन्हें अपने पैर बचाने के लिए कलाबाजियाँ खानी पड़ती हैं।

नगर पालिका की 'गहरी नींद' और प्रशासन के 'दिशानिर्देश'

यह क्षेत्र नगर पालिका परिषद के अधिकार क्षेत्र में आता है, जहाँ के अधिकारी इस 'तालाब' को एक कलाकृति मानकर मूकदर्शक बने हुए हैं। जिला प्रशासन द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन इस 'तालाब' ने बखूबी किया है—यानी, स्थिति को 'जस की तस' बनाए रखने की कसम को पूरी निष्ठा से निभाया गया है।

मच्छरों का पाँच सितारा आशियाना

गंदगी और मच्छरों ने यहाँ अपना स्थायी डेरा जमा लिया है। मरीजों का कहना है कि आयुष चिकित्सालय में इलाज तो बाद में होगा, पहले मच्छरों के साथ 'जंग' जीतना अनिवार्य हो गया है। स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का आलम यह है कि वे अब इस तालाब को 'संरक्षित क्षेत्र' घोषित करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फिलहाल स्वास्थ्य सेवा के नाम पर यहाँ जो 'सुविधा' मिल रही है, वह नागरिकों के धैर्य की परीक्षा लेने के लिए पर्याप्त है।

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