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सूरजपुर का नया ‘वाटरपार्क’: लोक निर्माण विभाग ने रिंग रोड को बनाया ‘तालाब-ए-खास’

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​रिंगरोड बना ‘तालाब-ए-खास’ : सूरजपुर का नया ‘वाटरपार्क’: लोक निर्माण विभाग ने रिंग रोड को बनाया ‘तालाब-ए-खास’

Rajesh Soni

Mon, Jul 20, 2026

सूरजपुर। अब आपको स्विमिंग पूल या वाटरपार्क जाने के लिए टिकट खरीदने की कोई जरूरत नहीं है! लोक निर्माण विभाग ने शहर की जनता के लिए बिलकुल मुफ्त में सूरजपुर रिंग रोड पर ही एक भव्य ‘तालाब’ का निर्माण कर दिया है। विभाग की इस अनूठी मेहरबानी से अब राहगीर सड़क पर चलते-चलते पानी के मजे ले रहे हैं और साथ ही मुफ्त में रोमांचक झटके भी खा रहे हैं।

​गिट्टियों का ‘अमेजन बेसिन’ और हफ्ताभर का सन्नाटा

​हाल कुछ ऐसा है कि सड़क पर पड़े बड़े-बड़े गड्ढे अब किसी मिनी तालाब से कम नहीं दिखते। विभाग ने जनता पर रहम खाते हुए सड़क के किनारे गिट्टी के बड़े-बड़े ढेर तो गिरा दिए—यह जताने के लिए कि “देखो भाई, हम काम कर रहे हैं!”—लेकिन उसके बाद वे ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सिर से सींग।

​नगर के लोगों का कहना है कि इन गिट्टियों को गिराए हुए एक हफ्ता बीत चुका है, मगर रिपेयरिंग का काम कछुए की चाल से भी धीमा यानी शून्य पर अटका हुआ है। वाहन चालक रोज इन गिट्टी के ढेरों और गड्ढों से कुश्ती लड़ते हुए गुजर रहे हैं।

​“कागजों से गए, दिलों (और फाइलों) में राज है”: एसडीओ साहब का जादुई जलवा

​इस पूरे ड्रामे में सबसे दिलचस्प मोड़ प्रशासनिक जादूगरी का है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जिस प्रभारी एसडीओ साहब को सरकारी आदेशों के तहत उनके पद से officially हटा दिया गया है, वे कागजों में भले ही ‘भूतपूर्व’ बन चुके हों, लेकिन धरातल पर आज भी वे ही ‘सुपरमैन’ बने हुए हैं।

​शासन का आदेश कचरे के डिब्बे में है और साहब की मनमर्जी का पहिया आज भी सरपट दौड़ रहा है। जनता परेशान है, वाहन चालक त्राहिमाम कर रहे हैं, लेकिन साहब के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। जब उनसे पूछा जाता है कि “जनाब, सड़क कब सुधरेगी?”, तो उनके पास सिवाय चुप्पी और टालमटोल के कोई जवाब नहीं होता।

भगवान भरोसे व्यवस्था, अधिकारी मस्त

तालाब का प्रकार: मुफ्त, गड्ढेदार और दुर्घटनाओं से भरपूर।

गिट्टी का स्टेटस: एक हफ्ते से सड़क की शोभा बढ़ा रहा शोपीस।

एसडीओ साहब की स्थिति: कागजों में नदारद, जमीन पर बेताज बादशाह।

जनता की दुआएं: विभाग के इन ‘अथक प्रयासों’ के लिए रोज मिल रहा अनगिनत आशीर्वाद!

​अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस ‘वाटरपार्क’ को सड़क में कब तब्दील करते हैं, या फिर जनता को ऐसे ही मुफ्त एडवेंचर का लुत्फ उठाते रहना पड़ेगा।

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