चेतावनी : '30 दिन में लाइट दो, वरना मंत्री आवास का कनेक्शन काटेंगे! आज भी अंधेरे में 38 गाँव
Pappu Jayswal
Fri, Aug 7, 2026
सूरजपुर। आज़ादी के 79वें साल में जहाँ देश डिजिटल क्रांति के ढिंढोरे पीट रहा है, वहीं सूरजपुर जिले के चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के 38 गाँव आज भी आदिम युग जैसे अंधेरे में सिसक रहे हैं। वादों की मुफ़्त मुर्गियों से आज़ाद हो चुके सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को बिहारपुर थाना परिसर के सामने तीखी हुंकार भरी। 'बिजली अधिकार आंदोलन' के बैनर तले उतरी आम आदमी पार्टी (AAP) और आक्रोशित ग्रामीणों ने हुक्मरानों की नींद हराम कर दी आसमान से टूटती मूसलाधार बारिश, जनता का जज़्बा एक इंच भी पीछे नहीं हटा।
"झांसे में नहीं आना है, क्षेत्र में बिजली लाना है!"
बारिश में भीगते हुए नारों की गूँज ने प्रशासनिक दफ्तरों के दरवाज़े कँपा दिए। ग्रामीणों ने साफ़ कह दिया कि अब कागज़ी आश्वासनों का दौर खत्म हो चुका है। धरना स्थल पर तंज कसते हुए वक्ताओं ने कहा कि वादों की दीवाली तो हर चुनाव में मनाई जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि दशकों बाद भी बच्चों के भविष्य पर अंधेरे की कालिख पुती हुई है।
सरकारी दावों की उधेड़ी बखिया:
पार्टी के लोकसभा सचिव लव कुमार और जिलाध्यक्ष रवि जायसवाल ने अखबारी खबरों और प्रशासनिक दावों के बीच के फर्क को बेनकाब किया। संगठन महासचिव पुनीत दुबे के मुताबिक, प्रशासन जिन 28 (38) गांवों में सितंबर से काम शुरू होने का ढोल पीट रहा है, उसकी ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है—अधिकारियों के ही अनुसार सिर्फ़ 11 गांवों को स्वीकृति मिली है, जिनके टेंडर 24 अगस्त को खुलने हैं। बाकी 17 गांव आज भी कागज़ों में लावारिस पड़े हैं।
30 दिन का अल्टीमेटम: 'मंत्री आवास का कटेगा सिंबॉलिक कनेक्शन'
आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन की रीढ़ पर सीधा वार करते हुए 30 दिनों की मोहलत दी है। आप नेताओं ने सीधी चेतावनी दी कि अगर तय दिन के भीतर सभी छूटे गांवों के लिए बजट, प्रशासनिक स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन का रुख सीधे क्षेत्र की विधायक व महिला एवं बाल विकास मंत्री के बंगले की तरफ होगा। ग्रामीण न केवल मंत्री आवास का लोकतांत्रिक घेराव करेंगे, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से उनकी बिजली काटकर यह अहसास कराएंगे कि बिना पावर के ज़िंदगी कैसी होती है। धरने में लव कुमार, रवि जायसवाल, पुनीत दुबे, अजय घोष, चंद्रबली राजवाड़े और सर्वेश गुप्ता समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि यह लड़ाई अब किसी सियासी दल की नहीं, बल्कि वजूद और अपने अधिकार की है। अगर 30 दिन में लाइट नहीं जली, तो सूरजपुर की सड़कों पर जन-आक्रोश का ऐसा धमाका होगा जिसकी जवाबदेही पूरी तरह बेपरवाह प्रशासन की होगी। इस दौरान महासचिव पुनीत दुबे, अजय घोष, चंद्रबली राजवाड़े, संदीप यादव, राकेश जायसवाल, गजमोचन सिंह, लक्ष्मण जायसवाल, तुलसी जायसवाल, सुरेश देवांगन, सर्वेश गुप्ता, माया सिंह, सुनील जायसवाल, आशीष कुशवाहा, खगेश्वर चौधरी, श्यामबिहारी कुशवाहा सहित भरी संख्या में ग्रामीण एवं पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन