दीपावली मिलन : जहाँ दीयों की रोशनी से ज्यादा रोशन हुई दिलों की महफिल—अफसरों और कलमकारों के संगम की एक शायराना दास्ताँ
Rajesh Soni
Fri, Nov 6, 2026
सूरजपुर। त्योहारों की इन झिलमिलाती फिजाओं के बीच, जब सूरजपुर का जिला मुख्यालय दीयों के प्रकाश से नहला हुआ था, तब भीतर दिलों को रोशन करने वाला एक अनूठा समां सजा। मौका था जिला प्रशासन द्वारा आयोजित ‘दीपावली मिलन समारोह’ का, जहाँ कागजी फाइलों और प्रशासनिक औपचारिकताओं से परे, इंसानियत, कला और आत्मीयता के रंग खुलकर बिखरे। यह महफिल सिर्फ एक मेल-मिलाप नहीं, बल्कि शब्दों, सुरों और जज्बातों का एक ऐसा कारवां थी, जिसने हर दिल को छू लिया।
जब जिला मुख्यालय के सभा कक्ष में जिले का प्रशासनिक अमला और कलम के सिपाही (पत्रकार) आमने-सामने बैठे, तो लगा कि हवाओं में कोई पुरानी गजल तैरने लगी हो। औपचारिकताएं पीछे छूट गईं और मंच पर उतरा सुर, ताल और शायरी का एक ऐसा कारवां, जिसने शाम को यादगार बना दिया।

जब महफिल में उतरीं लफ्जों की परचाइयाँ...
प्रशासन की नुमाइंदगी करते हुए जब जिले के मुखियाओं ने अपनी कला के हुनर दिखाए, तो लगा कि कमान और कलम दोनों के धुरंधर एक ही मंच पर उतर आए हैं।
कलेक्टर रैना जमील की संजीदा शायरी: जब कलेक्टर साहिबा ने माइक संभाला, तो उनकी जुबान से निकले अल्फाजों ने महफिल की चाल ही बदल दी। रिश्तों की नजाकत, अपनों की बेरुखी और सच के आइने पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं को उन्होंने जिस संजीदगी और गहराई से बयां किया, उसने श्रोताओं को भीतर तक झकझोर दिया। उनकी इन पंक्तियों पर महफिल देर तक वाह-वाह कर उठी: "हजार रात जागे चाँद, कोई सराहना नहीं, एक अमावस क्या हुई, सब बुरा मान गए... जब तलब थी तब तो अच्छा था, जो आवाज़ उठाई, सब बुरा मान गए, सच बात जो जुबां पर आई, सब बुरा मान गए। रिश्ते तुमने निभाए हैं, इसका भरम तुमको था, राज़ जो हमने बताए, सब बुरा मान गए। इन रंजिशों का हाल सुलझता ही नहीं, 'सुलह' कब तक करे, सब बुरा मान गए!"
"हजार रात जागे चाँद, कोई सराहना नहीं,
एक अमावस क्या हुई, सब बुरा मान गए...
जब तलब थी तब तो अच्छा था, जो आवाज़ उठाई, सब बुरा मान गए,
सच बात जो जुबां पर आई, सब बुरा मान गए।
रिश्ते तुमने निभाए हैं, इसका भरम तुमको था,
राज़ जो हमने बताए, सब बुरा मान गए।
इन रंजिशों का हाल सुलझता ही नहीं, 'सुलह' कब तक करे, सब बुरा मान गए!"
सुरों और तर्जों का खूबसूरत सफर: कानून और व्यवस्था के पहरेदार एसपी योगेश पटेल ने जब अपने दिलकश अंदाज में पुराने दौर के रोमांटिक तरानों के सुर छेड़े, तो हर शख्स अपनी पुरानी यादों के हसीन झरोखों में लौट गया। वहीं, जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले ने छत्तीसगढ़ी माटी की सौंधी खुशबू समेटे लोकगीतों से फिजा को सराबोर कर दिया। डीएफओ विपुल अग्रवाल ने प्रेम की फुहार और प्रकृति के सुकून को अपने शब्दों में पिरोकर महफिल में चार चांद लगा दिए।
कलमकारों का दिलकश पलटवार और जज्बातों का ज्वार
अफसरों के इस साहित्यिक वार के जवाब में पत्रकार साथियों ने भी अपने तरकश के सबसे खूबसूरत तीर निकाले। जिंदगी की धूप-छांव, प्रेम, त्याग और हालातों की कसौटी पर कसे उनके गीतों और शेरों ने महफिल में कभी आँखों को नम किया, तो कभी होठों पर मुस्कान बिखेर दी। दर्द और सुकून का यह संगम कभी गमगीन हुआ तो कभी ठहाकों से गूँज उठा।
सौहार्द और अपनापन का खूबसूरत पैगाम
दीयों के इस पर्व पर सजा यह मिलन समारोह सूरजपुर की आबोहवा में मोहब्बत और भाईचारे की मिठास घोल गया। अंत में कलेक्टर रैना जमील, एसपी योगेश पटेल, सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले और डीएफओ विपुल अग्रवाल ने सभी को दीपावली की अनंत शुभकामनाएँ देते हुए जिस आत्मीयता का परिचय दिया, उसने यह साबित कर दिया कि जब दिल से दिल मिलते हैं, तो हर फासला और शिकवा काफूर हो जाता है।
यह शाम सूरजपुर के इतिहास में एक ऐसी कविता बनकर दर्ज हो गई, जिसकी गूँज लंबे समय तक दिलों में ताज़ा रहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन