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शिवपार्क में खंडित पड़ी है स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा, कागजी निरीक्षण पर उठ रहे बड़े सवाल!

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भाषणों में महापुरुषों का ‘सम्मान’, धरातल पर प्रतिमाएं ‘बेहाल’ : शिवपार्क में खंडित पड़ी है स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा, कागजी निरीक्षण पर उठ रहे बड़े सवाल!

Subhas Gupta

Wed, Nov 4, 2026

सूरजपुर से तीखी खबर

​एक तरफ जिले में भव्य आयोजनों और विकास के दावों की चमक-धमक का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, तो दूसरी तरफ मंचों से छत्तीसगढ़ की अस्मिता और महापुरुषों के सम्मान की लंबी-चौड़ी बातें करने वाले जिम्मेदार अफसर धरातल पर पूरी तरह नंगे साबित हो रहे हैं। कलेक्टर कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर स्थित वन विभाग का 'शिव पार्क' प्रशासनिक संवेदनशीलता की पोल खोलने के लिए काफी है। यहाँ राष्ट्र के गौरव और महापुरुषों की प्रतिमाएं खुद अपनी बदहाली पर आँसू बहा रही हैं।

​कागजी निरीक्षण और भाषणों तक सीमित प्रशासनिक अमला

​हाल ही में कलेक्टर,डीएफओ समेत तमाम अधिकारियों और प्रशासनिक अमले ने जिले में निरीक्षण का भारी-भरकम दौर चलाया था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि शिव पार्क की यह भयानक तस्वीर इन ‘सुपरविजन’ करने वाले अधिकारियों की आँखों से कैसे ओझल रही?

​पार्क के भीतर स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का चेहरा बुरी तरह खंडित हो चुका है, और राष्ट्रीय गौरव की प्रतीक 'भारत माता' की प्रतिमा के आसपास झाड़ियां व गंदगी पसरी हुई है। करोड़ों के जश्न और भाषणों के शोर में क्या अफसरों को इन महापुरुषों की यह दुर्दशा दिखाई नहीं दी, या फिर उनका निरीक्षण सिर्फ फाइलों में खानापूर्ति बनकर रह गया है?

​जश्न करोड़ों का, व्यवस्था बदहाल!

​राज्य के बड़े आयोजनों और उत्सवों के दौरान भी वन विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर इस खंडित प्रतिमा पर नहीं पड़ी। जब नाक के नीचे स्थित पार्क का यह हाल है, तो दूर-दराज के इलाकों की व्यवस्था का भगवान ही मालिक है। क्या प्रदेश की अस्मिता का सम्मान केवल मंचों के भाषणों और कागजी विज्ञापनों तक ही सीमित रह गया है? ​अधिकारियों के दौरों और निरीक्षण का क्या औचित्य, जब शहर के बीचों-बीच महापुरुषों का ऐसा अपमान हो रहा हो? ​शिव पार्क की इस दुर्दशा के लिए कौन सा अधिकारी जिम्मेदार है और खंडित प्रतिमाओं की मरम्मत तथा सफाई कब होगी?

​सूरजपुर की यह ग्राउंड रिपोर्ट प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को साफ उजागर कर रही है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस सनसनीखेज खुलासे के बाद नींद से जागते हैं या यह मामला भी हमेशा की तरह फाइलों की धूल में दबा दिया जाता है।

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