केक-मोमबत्ती छोड़ 'बाबा' के जन्मदिन पर बही खून की धारा : सूरजपुर में कांग्रेसी बोले—'तोहफे में जान देंगे!'
Rajesh Soni
Sat, Oct 31, 2026
टी.एस. सिंहदेव के जन्मदिन पर जिला अस्पताल में लगा रक्तदान का मेला, जफर हैदर की अगुवाई में जमा हुआ 19 यूनिट 'जीवन'
सूरजपुर। राजनीति में जब नेताओं का जन्मदिन आता है, तो अमूमन शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स, आतिशबाजी का धुआं और किलो-किलो के भारी भरकम केक कटते दिखाई देते हैं। मगर सरगुजा राजपरिवार के महाराजा और प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव (टी.एस. बाबा) के जन्मदिन पर सूरजपुर के कांग्रेसियों ने सियासी दिखावे से हटकर 'रगों की नब्ज' पकड़ ली। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) ने आज शनिवार को जिला चिकित्सालय में बाकायदा सुई लगवाकर 19 यूनिट रक्तदान किया और संदेश दिया कि साहब के जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा किसी जरूरतमंद की सांसें बचाना है।
फूल-माला की जगह खिंचीं आस्तीनें
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जफर हैदर के नेतृत्व में कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे और नारेबाजी के बजाय सीधे डोनर बेड पर लेट गए। देखते ही देखते 19 यूनिट रक्त जमा हो गया। अस्पताल के गलियारे में चर्चा रही कि केक काटने में जो पसीना बहाया जाता, उसे कार्यकर्ताओं ने मरीजों की रगों में नई जिंदगी बनकर दौड़ाने का फैसला किया।
'जिंदगी और मौत के फासले को पाटना ही असली राजनीति'
शिविर के दौरान कांग्रेस नेताओं ने दो-टूक कहा कि सड़क हादसों, गंभीर ऑपरेशनों और जचकी (प्रसव) के वक्त जब मरीज जिंदगी और मौत के झूले पर झूलता है, तब नेताओं के भाषण नहीं, बल्कि ब्लड बैंक में रखी यही एक-एक यूनिट खून की थैली काम आती है। युवाओं से अपील की गई कि रक्तदान को लेकर मन में पाले गए वहम को बाहर फेंकें, क्योंकि खून देने से कमजोरी नहीं, बल्कि इंसानियत मजबूत होती है।
'बाबा' के नाम पर जुटे दिग्गज
जन्मदिन के इस सेवा यज्ञ में सूरजपुर के कई सियासी चेहरे एक साथ नजर आए। पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष नरेश राजवाड़े, पूर्व जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष राजीव सिंह, अनुपम फिलिप, कृष्ण कुमार सिंह, प्रेमजीत सिंह और धर्मेंद्र सिंह ने रक्तदान कर रहे युवाओं की पीठ थपथपाई।
शिविर में मुख्य रूप से अविनाश यादव, दीपक कर, हिमाचल राजवाड़े, अखिलेश ठाकुर, सूरज अवस्थी, सैयद आमिल, शिवम साहू, मनुप्रताप सिंह, मुस्तफा, सोनू राजवाड़े और अदनान सहित बड़ी तादाद में कार्यकर्ता मौजूद रहे। अस्पताल पहुंचे तीमारदारों का कहना था कि काश हर सियासी जलसा इसी तरह किसी की बुझती सांसों का सहारा बन जाए!
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