सूरजपुर में ‘अजब प्रेम की गजब सियासत : मैडम दिल्ली में लगा रहीं नारे, तो मास्टर साहब ने अस्पताल में बहाया ‘शाही’ खून!
Subhas Gupta
Sun, Nov 1, 2026
सूरजपुर। राजनीति में समर्पण के कई किस्से सुने होंगे, लेकिन सूरजपुर में जो नजारा दिखा, उसने ‘पति-पत्नी और सियासत’ की एक नई परिभाषा गढ़ दी है। मौका था सरगुजा के ‘महाराज’ और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के जन्मदिन का। अब महाराज का जन्मदिन हो और कांग्रेसी निष्ठा का टेस्ट न हो, ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन असली सुर्खी तब बनी जब पता चला कि मैडम की गैरमौजूदगी में मास्टर साहब ने बाजी मार ली!
दिल्ली में मैडम का जलवा, सूरजपुर में पति का ‘रक्तदान महादान’
नगर पालिका परिषद की तेजतर्रार अध्यक्ष श्रीमती कुसुम लता राजवाड़े फिलहाल पार्टी आलाकमान के आह्वान पर दिल्ली के रामलीला मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं। वहां से उनका नारा बुलंद हो रहा है, तो इधर सूरजपुर में महाराज के जन्मदिन पर ‘हाजिरी’ कौन दर्ज कराता?
बस फिर क्या था! 'अर्धांगिनी' की राजनीतिक कमी को पूरा करने के लिए मैदान में उतरे उनके पतिदेव सुरेन्द्र राजवाड़े—जो पेशे से सरकारी शिक्षक हैं। मास्टर साहब ने सोचा कि जब मैडम दिल्ली में पार्टी के लिए पसीना बहा रही हैं, तो महाराज के जन्मदिन पर वह भी सूरजपुर जिला अस्पताल में थोड़ा 'खून' बहा ही आएं।
सरकारी सेवा और कांग्रेसी वफादारी का ‘सुपर कॉम्बो’
मास्टर साहब कांग्रेसी कुनबे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अस्पताल पहुंचे, बांहें ऊपर चढ़ाईं और फटाक से रक्तदान कर डाला। अस्पताल में मौजूद लोग यह देखकर हैरान भी थे और मुग्ध भी—एक तरफ सरकारी सेवा की जिम्मेदारी, तो दूसरी तरफ पत्नी के राजनीतिक रसूख को ठंडा न पड़ने देने की बेजोड़ कला!
शहर के चौक-चौराहों पर अब इसे “पति-पत्नी का आदर्श तालमेल” कहा जाए या “घर बैठे राजनीतिक प्रतिनिधित्व”, इसी बात पर चटखारे लिए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि नेताजी भले ही दिल्ली में हल्ला बोल रही हों, लेकिन स्थानीय सियासत में उनके घर का मीटर बराबर दौड़ रहा है।
अब इसे कहते हैं असली 'होम डिलीवरी' राजनीति—नेताजी दिल्ली में डटी रहें, महाराज की चौखट पर वफादारी की रसीद कटवाने के लिए मास्टर साहब जिंदाबाद हैं!
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