टाइगर' का पता नहीं, कार्यालय में महुआ ताल पर झूम रहे 'चौकीदार : गुरु घासीदास रिजर्व में अनोखा राज्योत्सव!
Rajesh Soni
Sun, Nov 1, 2026
सूरजपुर। एक तरफ पूरा छत्तीसगढ़ राज्योत्सव की रोशनी में जगमगा रहा है, सरकारी दफ्तरों में दीप जल रहे हैं, तो दूसरी तरफ सूरजपुर के गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान महुली परिक्षेत्र में पदस्थ चौकीदारों ने उत्सव मनाने का एक बिल्कुल ‘अनोखा और मदमस्त’ मॉडल पेश कर दिया है। रेहण्ड (महूली) पार्क परिक्षेत्र के कार्यालय में जंगलों और बाघों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले चौकीदार देसी ‘महुआ टॉनिक’ की चुस्कियां लेकर ऐसे थिरके कमर को ऐसे भटकाए कि सोशल मीडिया का पारा चढ़ गया।
वीडियो में चौकीदार रामविशाले देवांगन, शत्रुघ्न सिंह और मनमोहन जैसे ‘जांबाज’ कर्मचारी पूरे सुर-ताल के साथ डिस्को करते दिखे, जबकि चौथे साथी वीडियो बनाकर इस ‘ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम’ का दस्तावेजीकरण करने में जुटे थे। अब जब हुनर इतना नायाब हो, तो महदूद कैसे रहता? चौकीदार भारत देवांगन ने इसे सीधे सोशल मीडिया के हवाले कर दिया और आज शाम 5 बजे से यह वीडियो जनता के बीच मुफ्त मनोरंजन और सरकारी व्यवस्था पर तमाचे की तरह घूम रहा है।

साहब दो महीने से ‘तपस्या’ पर, बैरियर पर ‘अवैध वसूली एक्सप्रेस’ चालू
इस पूरे सांस्कृतिक जलसे का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि महकमे के कर्ता-धर्ता यानी रेंजर साहब पिछले दो महीने से इलाके से नदारद हैं। बताया जा रहा है कि साहब सोनहत में विराजमान हैं। अब जब "जंगल के राजा" यानी साहब ही मैदान छोड़ चुके हों, तो प्यादों का नाचना तो बनता है! चर्चा है कि साहब की गैर-मौजूदगी में क्षेत्र 'रामभरोसे' नहीं, बल्कि 'वसूली भरोसे' चल रहा है। बैरियरों पर आने-जाने वाले वाहनों से मनमानी जेब-कटाई और लकड़ी की बेखौफ तस्करी की जुगलबंदी से सिस्टम इतना लहलहा रहा है कि चौकीदारों की खुशी रेस्ट हाउस के फर्श पर पैरों से छलक पड़ी।
वहीं इस कार्यालय से महुआ के सुर और जाम टकराने की झंकार सुनाई दे रही है। राज्य स्थापना दिवस पर मिले इस 'अनूठे तोहफे' को देखकर जनता हैरान भी है और लोटपोट भी।
फिलहाल, सोशल मीडिया पर जनता इस अनोखे 'राज्योत्सव डांस' की दाद देते हुए पूछ रही है—क्या विभाग इन मदमस्त नर्तकों और लापता साहब पर कोई कार्रवाई करेगा, या फिर इसे विभाग का आधिकारिक ‘सांस्कृतिक महोत्सव’ मानकर फाइल बंद कर दी जाएगी?
विज्ञापन
विज्ञापन