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एडवेंचर स्पोर्ट्स’बना पुरानपारा स्कूल, टपकती छत और गिरते प्लास्टर के बीच 38 मासूमों की 'साहसिक' पढ़ाई!

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खतरा : एडवेंचर स्पोर्ट्स’बना पुरानपारा स्कूल, टपकती छत और गिरते प्लास्टर के बीच 38 मासूमों की 'साहसिक' पढ़ाई!

Rajesh Soni

Sat, Aug 8, 2026

10 लाख का बजट गायब, 2022 के वादे टपक रहे छत से; शिक्षक बोले- 'हादसा हुआ तो हमारी कोई गारंटी नहीं!'

सूरजपुर। यदि आप अपने बच्चों को बचपन से ही जोखिम उठाने और 'सर्वाइवल स्किल्स' (जीवित रहने की कला) सिखाना चाहते हैं, तो सूरजपुर जिले के बिहारपुर चांदनी क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक शाला पुरानपारा से बेहतर कोई संस्थान नहीं हो सकता! यहाँ 38 से अधिक मासूम बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ हर दिन 'लाइव थ्रिल' का अनुभव कर रहे हैं।

​अधिकारियों के कागजी दावों का नतीजा है कि मासूम बच्चे टपकती छत के नीचे 'वॉटर-पार्क' जैसी स्थिति में भी जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं।

स्कूल की 'वर्ल्ड-क्लास' सुविधाएँ:

इनडोर वॉटर-पार्क 🌊: दो कमरों के इस स्कूल में बारिश के दिनों में छत से अविरल जलधाराएँ बहती हैं। बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ जल-संरक्षण का व्यावहारिक पाठ भी सीख रहे हैं।

अंतरिक्ष-यात्री प्रशिक्षण : सीलन भरी दीवारों और सिर पर मंडराते प्लास्टर के बीच बैठना बच्चों के 'रिफ्लेक्स' को किसी नासा (NASA) एथलीट की तरह मजबूत बना रहा है।

10 लाख रुपये का 'अदृश्य' बजट और गायब ठेकेदार

​विभाग ने 'स्कूल जतन योजना' के तहत करीब 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करके अपनी भारी 'उदारता' दिखाई थी। काम का आदेश भी जारी हुआ। लगभग आठ महीने पहले काम शुरू भी हुआ, लेकिन फिर ठेकेदार साहब अधूरा निर्माण छोड़कर ऐसे अदृश्य हुए कि अब वैज्ञानिक भी उस बजट को खोजने में असमर्थ हैं। चर्चा तो यह भी है कि राशि वापस लौट गई, पर समस्या वहीं की वहीं टिकी रही।

शिक्षक का 'सेफ्टी डिस्क्लेमर' और वादों की नमी

​स्कूल के शिक्षक सूरज सिंह ने प्रशासनिक दूरदर्शिता दिखाते हुए ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को लिखित चेतावनी जारी कर दी है—"यदि जर्जर भवन में कोई घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी!" इसे शिक्षा विभाग का नया 'सुरक्षा प्रोटोकॉल' माना जा रहा है, जिसके तहत जल्द ही बच्चों के लिए बस्ते के साथ 'हेलमेट' अनिवार्य किया जा सकता है।

गांव की सरपंच फुलमती सिंह और ग्रामीण कमता सिंह पिछले 5 वर्षों से कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक पत्र भेज चुके हैं, लेकिन व्यवस्था के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

​🏆 विशेष पुरस्कार एवं तीखे सवाल

​इस अद्भुत शैक्षणिक माहौल के लिए क्षेत्र के शिक्षा अधिकारियों और हाउसिंग बोर्ड को 'सर्वश्रेष्ठ इनडोर वॉटर-पार्क एवं लाइफटाइम अचीवमेंट इन नेग्लिजेंस पुरस्कार' से सम्मानित किया जाना चाहिए!

​अब तंत्र से कुछ सीधे सवाल:

बजट का रहस्य: 10 लाख रुपये स्वीकृत होने के बाद निर्माण एजेंसी काम अधूरा छोड़कर कैसे गायब हो गई?

संवेदनहीनता की हद: जब शिक्षक ने लिखित में दे दिया कि हादसे की जिम्मेदारी उनकी नहीं, तो क्या अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद केवल फीता काटने और शोक जताने का इंतज़ार कर रहे हैं?

कागजी दावे: कागजों पर सुधरती शिक्षा व्यवस्था की सीलन मासूम बच्चों के भविष्य को कब तक भिगोती रहेगी?

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