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हाथी का ‘रात का भोज’, किसानों की मेहनत पर फेरा पानी: रसोंकी में तांडव, कुंभकर्णी नींद में वन अमला

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हाथी का तांडव : हाथी का ‘रात का भोज’, किसानों की मेहनत पर फेरा पानी: रसोंकी में तांडव, कुंभकर्णी नींद में वन अमला

Rajesh Soni

Fri, Oct 2, 2026

सूरजपुर। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की सीमा पर बसे रसोंकी गांव में बीती रात एक दंतैल हाथी ने अपनी ‘शाही दावत’ का इंतजाम किया, जिसका बिल हमेशा की तरह बेबस किसानों को अपनी खून-पसीने की फसल देकर चुकाना पड़ा। जब तक वन विभाग कागजी मुस्तैदी और निगरानी के दावों में मशगूल रहा, तब तक अकेला हाथी आबादी के बीच पहुंचा, दो किसानों की लहलहाती धान की फसल को रौंदकर पूरी तरह जमींदोज किया और सुबह तसल्ली से कोरिया जिले के जंगलों की ओर कूच कर गया।

​किसानों के हिस्से रतजगा, अमले के हिस्से ‘कागजी गश्त’

सूरजपुर-कोरिया सीमा स्थित रसोंकी गांव में आधी रात को हुई इस धमक ने साफ कर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वन्यजीवों की ट्रैकिंग किस स्तर पर चल रही है। हाथी ने किसान राममिलन सिंह और मंगल सिंह के खेतों पर धावा बोला और कई एकड़ फसल को पैरों तले कुचल दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब हाथी खेतों में तबाही मचा रहा था, तब विभाग का कोई अलर्ट या ट्रैकिंग सिस्टम काम नहीं आया। अब हालात यह हैं कि विभाग की इसी 'चुस्त' कार्यप्रणाली के भरोसे ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ रातभर जागकर अपनी जान-माल की रखवाली करने को मजबूर हैं।

​हादसे के इंतजार में बैठा सिस्टम?

सीमावर्ती इलाका होने के बावजूद न कोई मुनादी कराई गई, न ही हाथी के मूवमेंट की कोई पूर्व सूचना दी गई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि विभाग हमेशा किसी बड़ी अनहोनी या जनहानि के बाद ही हरकत में आता है। यदि यह दंतैल खेतों से निकलकर रिहायशी घरों की ओर रुख कर गया, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

​दहशतजदा ग्रामीणों ने पार्क प्रबंधन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि फाइलों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर गश्ती दल तैनात किया जाए, हाथियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो और पीड़ित किसानों को बिना दफ्तरी हीलाहवाली के तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए।

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