भाजपा ने ली ऐसी ‘प्रेसवार्ता : ‘काल्पनिक प्रेस, नकली गुस्सा’: अटल कुंज में भाजपा का सोलो ड्रामा, न पत्रकार पहुंचे न कैमरे...
Rajesh Soni
Tue, Sep 29, 2026
नेता भी अपने, श्रोता भी अपने... कुर्सियां खाली, सूरजपुर भाजपा ने ली ऐसी ‘प्रेस नदारद, फिर भी गरजीं पैकरा’: बंद कमरे में भाजपाई खुद ही बोले, खुद ही बजा ली ताली!
काल्पनिक पत्रकारों के आगे नकली गुस्सा: अटल कुंज में भाजपा का ‘वन-वे ट्रैफिक’, बिना प्रेस के ही मांग लिया राहुल से इस्तीफा!
सूरजपुर। सूरजपुर की सियासत में इन दिनों ‘अदृश्य पत्रकारिता’ का ऐसा नायाब दौर आया है कि लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो रहे हैं। मामला स्थानीय भाजपा दफ्तर ‘अटल कुंज’ का है, जहां राहुल गांधी का कच्चा-चिट्ठा खोलने के लिए एक ‘तूफानी’ पत्रकार वार्ता बुलाई गई थी। मंच सजा, काल्पनिक माइक चमका, पानी के गिलास लगे, नेताजी बन-ठन कर पहुंचे, पर अफसोस—जिस ‘प्रेस’ के नाम पर यह नौटंकी रची गई थी, उसका एक भी परिंदा वहां फटकने को राजी नहीं हुआ।
फिर क्या था? सियासत का दस्तूर है कि 'शो मस्ट गो ऑन'। लिहाजा, सवाल पूछने वाले पत्रकारों के अभाव में भाजपा नेताओं ने खाली पड़ी प्लास्टिक की कुर्सियों को ही मीडिया मान लिया और जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा ने उन्हीं के सामने अपना भाषण चालू कर दिया। चेहरे पर ऐसा कड़क रोब, मानो सामने बीबीसी और सीएनएन के कैमरे लाइव चल रहे हों!
श्रीमती पैकरा ने खाली हाल में गूंजती अपनी ही आवाज के सहारे चुनाव आयोग की कथित 'क्लीन चिट' का झंडा बुलंद किया और फरमान सुना दिया कि राहुल गांधी अविलंब देश से कान पकड़कर माफी मांगें। मजे की बात यह रही कि न कोई तीखा प्रतिप्रश्न करने वाला था, न कोई यह पूछने वाला कि 'मैडम, सुन कौन रहा है?' नेताजी बोलती गईं, और सामने बैठे पार्टी के ही कार्यकर्ता बीच-बीच में ‘वाह-वाह’ कर ताली पीटकर असली पत्रकारों की कमी पूरी करते रहे।
शहर के चौक-चौराहों और चाय की टपरियों पर अब इस ‘घर-घर प्रेसवार्ता’ की जमकर खिल्ली उड़ रही है। लोग कह रहे हैं कि सवाल पूछे जाने के डर से बचने का यह सबसे सुरक्षित फॉर्मूला है—माइक भी अपना, स्क्रिप्ट भी अपनी, ताली भी अपनी और प्रेस वार्ता भी निपट गई!
इस ‘काल्पनिक प्रेस वार्ता’ की शोभा बढ़ाने वालों में जिलाध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी, पूर्व महामंत्री राजेश महलवाला, प्रवक्ता मुकेश गर्ग, दीपक गुप्ता, देव गुप्ता, मुकेश साहू, सहीम अंसारी, सोनू साहू और दीक्षित वर्मा समेत तमाम खासमखास चेहरे मौजूद रहे। इन सभी ने अंत तक बड़ी गंभीरता से नाटक का मंचन जारी रखा, मानों इतिहास की सबसे ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस इन्हीं के दफ्तर में संपन्न हुई हो।
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